अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान एडिटर- मान्यता प्राप्त पत्रकार) वाराणसी लुम्बनी राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 233 पर दर्जनों जनपदों को जोड़ने के लिए लगभग सवा अरब रुपये की लागत से बना टांडा कलवारी पुल को 90 दिनों के लिए पुनः बंद कर दिया गया है।
बताते चलेंकि अम्बेडकर नगर व आसपास के कई जनपदों को टांडा से पूर्वांचल के बस्ती, गोरखपुर सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर सहितअन्य जिलों की दूरी लगभग 100 किलोमीटर कम करने वाले घाघरा नदी पर बने टांडा-कलवारी पुल वर्ष 2013 में 1.19 अरब रुपये की लागत से तैयार किया गया था। 72 खंभों वाले 2231 मीटर लंबे पुल का लोकार्पण हुआ था। राज्य सेतु निगम द्वारा निर्मित पूर्वांचल के सबसे लंबे इस पुल को आठ वर्ष में बनाया था।

वर्ष 2013 में तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने उद्घाटन किया था। हाईवे के लिहाज से यह पुल शुरू से ही संकरा महसूस किया जा रहा है। हालांकि इस पुल के बनने से क्षेत्र में विकास और कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा मिला। लोकार्पण के बाद 10 वर्षों में यह पुल कई बार क्षतिग्रस्त हो चुका है।
वर्ष 2017 में पुल की बेयरिंग टूटने से लगभग 40 दिनों तक आवागमन बंद रहा था। इस बार वाहनों का दबाव बढ़ने से यह पुल क्षतिग्रस्त हो चुका है। पुल के बेयरिंग से लेकर खंभों तक क्षतिग्रस्त बताए जा रहे हैं। मरम्मत कार्य के दौरान टांडा से होकर बस्ती जाने वाले यात्रियों को आलापुर के बिड़हर घाट पुल के माध्यम से घनघटा होते हुए जाना पड़ेगा, जबकि बस्ती से आजमगढ़, वाराणसी जाने वाले वाहनों को धनघटा बाजार से बिड़हर घाट होकर आजमगढ़ निकलना होगा, इससे लगभग 70 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी होगी।
बहरहाल टांडा कलवारी पुल अपने अस्तित्व में आने के मात्र 12 वर्ष में दूसरी बार लंबे समय के लिए 11 सितम्बर की रात्रि 12 बजे से आम आवागमन के लिए बंद कर दिया गया है, एनएचआई के अनुसार उक्त मरम्मत कार्य 90 दिनों में पूरा किया जाएगा।




