“तीन दशक तक अपनी शायरी के माध्यम से लोगों अपनी सकस्याओं को भुला कर हंसने पर मजबूर करते रहे शोला”
“वो मुझ से जब कभी मिलता है मुस्कुराता है, बहुत तपाक व मुहब्बत से पेश आता है।, समझ मे कुछ नहीं आता कि क्या इरादा है, मिला कर हाथ हथेली को गुदगुदाता है।”
लगभग 30 वर्षों तक अपनी शायरी से लोगों को हंसने पर मजबूर करने वाले प्रसिद्ध मज़ाहिया शायर आरिफ शोला टांडवी गत कई माह से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। मूल रूप से अम्बेडकर नगर जनपद के टांडा नगर क्षेत्र में स्थित मोहल्लाह सकरावल निवासी मोहम्मद आरिफ अंसारी उर्फ शोला टांडवी ने 1980, 1990 व 2000 के दशक में अपनी हास्य शायरी से प्रदेश व देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोगों को हंसने पर मजबूर कर टांडा का नाम रौशन किया था।
श्री शोला ने दुबई में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मुशायरा व कवि सम्मेलन में कई बार शामिल होकर क्षेत्र का ही नहीं बल्कि देश का नाम रौशन किया।
हेल्प प्वाइंट एनजीओ के सक्रिय सदस्य व आरिफ शोला टांडवी के पड़ोसी मोहम्मद असग़र अंसारी ने बताया कि हास्य शायरी के सहारे तीन दशक तक लोगों को हंसाने वाले प्रसिद्ध शायर आरिफ शोला टांडवी को विगत माह में फालिज का अटैक हुआ जिसके कारण वो घर पर ही रहने को मजबूर हो गए और उनकी आमदनी बन्द होने के कारण पूरा परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगा। श्री शोला के एक बेटी है जिसका विवाह हो चुका है जबकि दो अविवाहित लड़के है जो बुनाई पेशा से जुट कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।
श्री शोला नेताओं की जमकर खिंचाई भी करते थे उनका ये हास्य शेअर काफी मशहूर है कि “शादी शुदा जोड़े ने कहा ऐ नेता जी, दे दो आशीवार्द निवेदन करते हैं।, नेता बोले जाओ किसी पंडित से लो, हैम तो नेता हैं उद्घाटन करते हैं।”
श्री शोला का शेअर है कि “मंत्री बन गए दर्शन ना हुआ पांच बरस, वोट लेने के बहाने कुछ निकल आये हैं।, क्या इलेक्शन की कोई बीन बजी है शोला, सांप सब अपने ठिकाने से निकल आये हैं।”
श्री शोला काफी हंसमुख क्षवि के होने के कारण कहते है कि “वो मुझ से जब कभी मिलता है मुस्कुराता है, बहुत तपाक व मुहब्बत से पेश आता है।, समझ मे कुछ नहीं आता कि क्या इरादा है, मिला कर हाथ हथेली को गुदगुदाता है।”
श्री शोला का ये शेअर भी काफी मशहूर है कि ” “ज़ज़्बात के हुदूद को यूं पार कर गया।
फुटपाथ पे ही इश्क का व्यापार कर गया।।
शोला वो सादे भेष में महिला पुलिस थी।
शामत थी मेरी इश्क का इज़हार कर गया।।
बोसो के उसके गाल पर बौछार कर गया।
बच्चे को आज अपने बहुत प्यार कर गया।।
सौदा पटा पटाया था फिर भी ना जाने क्यों।
कमबख्त ऐन वक्त ओर इनकार कर गया।।”
बहरहाल शोला टांडवी ने बहुत बड़े बड़े मंचों पर अपनी शायरी के माध्यम से लोगों को गुदगुदाने का प्रयास किया लेकिन अब वो ऐसे पडाव पर हैं जहां से उठकर फिर उन ऊंचे स्टेज पर पहुंचना काफी मुश्किल है।
लगभग तीन दशक तक अपनी शायरी से लोगों को हंसने पर मजबूर करने वाला टांडा का मशहूर शायर गंभीर बीमारी व अर्थिक तंगी से जूझ रहा है लेकिन खुद्दारी इतनी है कि उनसे जब भी पूंछा जाता है तो हंस कर खुदा का शुक्र अदा कर देते हैं। आरिफ अपनी खुद्दारी में गुमनामी का जीवन बसर करने लगे हैं और साथ ही उनकी एक झलक पाने एवं हास्य शायरी सुनने वाली श्रोताओं की भीड़ भी रंगीन दुनिया मे ओझल हो गई है। क्षेत्र का देश व विदेशों में नाम रौशन करने वाले प्रसिद्ध शायर को जब अपने ही क्षेत्र के लोग भूल गए हैं तो अन्य लोगों से क्या शिकायत की जाए। (आलम खान – एडिटर इन चीफ की विशेष रिपोर्ट)





