भोगांव। विकासखण्ड सुल्तानगंज के ग्राम नाका में वीरेश राजपूत के आवास पर चल रही श्रीमद भागवत कथा एवं ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिन कथा वाचक पूरन चन्द्र शास्त्री ने कहा कि पाप का जीवन कठिन होता है।और पुण्य का सरल इस लिए जीवन मे कभी भी झूठ का साथ नहीं देना चाहिए।जो सत्य के साथ रहता है उसकी विजय जरूर होती है। यह जीव की इच्छा कही जाती है। इसका कारण भी ईश्वर ही है। जब जीवन के सारे कर्म ईश्वर की इच्छा से ही होते हैं, तब मनुष्य क्यों स्वयं को कर्ता माने? प्राकृतिक स्वभाव रूप सहज कर्म ही ईश्वरीय कर्म कहलाता है। इससे हटकर किया गया कर्म नकली या नकल रूप होता है। वह बुद्धि द्वारा आरोपित कर्म हो जाता है। वहां अहंकार की भूमिका मुख्य हो जाती है। तब जीव का कर्ता भाव हावी रहता है। इस मौके पर सह कथावाचक पं रागिनी व्यास,परीक्षत राकेश कुमार लोधी व नन्ही देवी,यज्ञपति वीरेश राजपूत, ओमकार सिंह, राम विलास,अरुण राजपूत,श्यामबाबू,अजब सिंह,सनी कांत,रोहित,सुनील कुमार,अभिलाख सिंह राजपूत,जिपस सपना वर्मा,सुधीर राजपूत,महेश चंद्र राजपूत,खुशीराम,अमर सिंह
राजपूत,मनोज राजपूत आदि मौजूद रहे।
सत्य की जीत सदैव होती है: पूरन चन्द्र शास्त्री


