बरेली (रिपोर्ट: कुनाल आर्य) सिरौली रामलीला में बृहस्पति वार को केवट प्रसंग, दशरथ मरण, भरत मिलाप की लीला का मंचन किया गया। अयोध्या के राजा दशरथ के स्वर्गवास होने का समाचार नंदीग्राम में जब भरत सुनते हैं, तो वे अयोध्या आते हैं। सारा हाल जानते हैं, तीनों माता कैकई, कौशल्या, सुमित्रा से वार्तालाप होता है, गमगीन माहौल में भरत अपना आपा खोकर कैकई को भला-बुरा कहते हैं। सुमंत भरत को समझाते हैं। भरत तीनों माता, परिजन और सेना के साथ चित्रकूट की ओर कूच करते हैं।
रास्ते में भारद्वाज मुनि और निषादराज से भेंट होती है। प्रयागराज की महिमा का बखान होता है। उधर, लक्ष्मण को पता चला कि भरत सेना सहित आ रहे हैं, वह क्रोधित होते हैं। भरत चित्रकूट पहुंचकर राम को ढूंढ़ते हैं। केवट उन्हें वह स्थान बताते हैं। राम यह सब देखते हैं, भरत राम को प्रणाम करते हैं।


