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ऐतिहासिक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भूमिपूजन व कार्यारम्भ पर विशेष रिपोर्ट

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(आलम खान एडिटर) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्राचीन धर्मस्थल व श्रीराम जन्मभूमि स्थान अयोध्या में 05 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की गवर्नर आनंदीबेन पटेल, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास आदि की मौजूदगी में मंदिर निर्माण का भूमिपूजन व शिलान्यास किया गया। बुधवार को विशेष विमान से श्री मोदी दिल्ली से लखनऊ पहुंचे जहां से उन्हें विशेष हैलीकॉप्टर से अयोध्या के साकेत महाविद्यालय लाया गया। साकेत महाविद्यालय से उनकी कार का काफिला सर्वप्रथम अयोध्या के राजा माने जाने वाले हनुमानजी का हनुमानगढ़ी में पहुंच कर दर्शन किया। हनुमानगढ़ी की परिक्रमा के उपरांत गद्दीनशीन ने श्री मोदी को पगड़ी व विशेष मुकुट भेंट कर आशीर्वाद दिया।धोती व भगवा सिल्क का कुर्ता पहने श्री मोदी ने श्रीरामलला का दर्शन किया और दंडवत प्रणाम करते हुए दान पेटिका में अपने हाथों से धन दान किया। दर्शन के उपरांत श्री मोदी ने हर्षश्रंगार अर्थात पारिहार के पौधे का वृक्षारोपण किया और फिर भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए। विशेष भूमि पूजन के दौरान मोहन भागवत, आनन्दी बेन पटेल, योगी आदित्यनाथ, नृत्यगोपाल आदि सहित लगभग 175 वीवीआईपी लोग शामिल हुए। 05 अगस्त को श्रीराम मंदिर स्थान का भूमिपूजन कर शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 44 मिनट 08 सेकेंड पर शिलान्यास किया गया।

“बाबरी मस्जिद रामजन्म भूमि” विवादित स्थल से श्रीराम मंदिर का सफर

आपको बताते चलेंकि श्रीराम जन्मभूमि परिसर में बनी बाबरी मस्जिद में कई सदियों से मुस्लिम समाज नमाज़ पढ़ता था लेकिन 500 वर्षों से उक्त स्थान पर श्रीराम जन्मभूमि को लेकर विवाद चलता रहा और 134 वर्ष पूर्व उक्त स्थान को लेकर न्यायालय में मुकदमा चलाने लगा और 22/23 दिसंबर 1949 की रात्रि में मूर्ति रखने के बाद से मामला काफी खराब हो गया तथा उक्त स्थान को विवादित स्थल घोषित कर सील कर दिया गया। हिन्दू धर्म के लोगों द्वारा आंदोलन चला कर 6 दिसम्बर 1992 को विवादित ढांचा गिरा दिया गया जिसके बाद से श्रीरामलला को टेंट में स्थापित किया गया था। 134 वर्ष चले मुकदमे के बाद देश की सर्वोच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय बेंच ने 16 अक्टूबर 2019 को फैसला सुरक्षित करते हुए 11 नवंबर को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया और विवादित परिसर श्रीराम जन्मभूमि स्थान मानते हुए हिन्दू पक्ष को सौंप दिया जबकि दूसरे पक्ष को उक्त परिसर से दूर पांच एकड़ भूमि देने का आदेश दिया और इस तरह लगभग 500 वर्ष पुराना बहुचर्चित धार्मिक प्रकरण का पटाक्षेप हो गया है।

05 अगस्त को शिलान्यास व कार्यारम्भ कार्यक्रम की झलक

श्रीराम जन्मभूमि परिसर में भव्य शिलान्यास व कार्यरम्भ कार्यक्रम आयोजित किया गया जहां बने विशाल मंच से प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व आरएसएस प्रमुख डॉक्टर मोहन भागवत, श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास सहित मौजूद सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि पांच शताब्दी से चल रहे विवाद का लोकतांत्रिक ढंग से न्यायिक पटाक्षेप हुआ जिसमें अनेक लोगों ने बलिदान दिया। कोविड 19 की महामारी के कारण कार्यक्रम में 200 से भी कम लोगों को आमंत्रित किया गया था तथा एक दूसरे से दूरियां बना कर बैठाया गया था। श्री योगी ने श्रीराम के सपनों को चरितार्थ करने का वादा करते हुए कहा कि बिना धार्मिक भेदभाव के सबका साथ व सबका विकास की नीति पर कार्य किया जाएगा।
आरएसएस प्रमुख डॉक्टर मोहन भागवत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज बड़े आंनद का क्षण है परंतु वैश्विक महामारी के कारण काफी लोगों को आमंत्रित नहीं किया जा सका है। श्री भागवत ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का कार्य पूर्ण होने से पहले अपने ह्रदय में श्रीराम का बसाना होगा अर्थात छल, कपट, धर्म, जाति समुदाय की भावना से बाहर निकलना होगा और देश ही नहीं सम्पूर्ण जगत को हृदय में समाने की क्षमता होनी चाहिए। उन्ह9ने कहा कि प्रभु श्रीराम सब के हैं और सब प्रभु श्रीराम के ही हैं। श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास ने का कि श्रीराम की मंदिर का ही नहीं बल्कि विश्व का निर्माण हो रहा है।प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, गवर्नर आनंद बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास के साथ बटन दबा कर शिलापट का लोकार्पण किया।
कार्यक्रम के अंत मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित से पूर्व जय सियाराम का उद्घोष किया और कहा कि ये उद्घोष सिर्फ अयोध्या में ही नहीं बल्कि इसकी गूंज पूरे विश्व में सुनाई दे रही है। श्रीराम भक्तों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि भारत एक स्वर्णिम अध्याय लिख रहा है और इस अवसर पर पूरा भारत रोमांचित व राममय है। श्री मोदी ने कहा कि राम हमारी संस्कृति के आधार हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या विश्व पटल पर काफी महत्वपूर्ण स्थान है और इससे अर्थतंत्र बदल जायेगा। श्री मोदी ने कहा कि आज का दिन सत्य, अहिंसा व बलिदान को समर्पित है और राष्ट्र को जोड़ने का उपक्रम है। उन्होंने देश भर के लोगों का सहयोग मिल रहा है और घर घर व गाँव गाँव से शिलाएं आई हैं।श्री मोदी ने भी सबका साथ व सबका विकास पर ध्यान आकर्षित कराते हुए कहा कि राम आधुनिकता पक्षधर हैं। श्री मोदी ने कोविड 19 की महामारी पर भी ध्यान आकर्षित कराते हुए कहा कि सावधानी अतिवश्यक है और इसलिए ‘दो गज की दूरी मास्क है जरूरी’ पर सभी लोगों को पालन करने का निर्देश दिया और अंत में जय सियाराम के उदघोष के साथ संबोधन समाप्त किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को सियाराम कह कर संबिधित किया जिसे देश बड़े बदलाव के रूप में देख रहा है।

—तो ऐसा होगा श्रीराम का ऐतिहासिक मंदिर

बहुप्रतीक्षित श्रीराम जन्मभूमि पर बनने वाली ऐतिहासिक श्रीराम मंदिर काफी भव्य होगा। 100 से 200 एकड़ की भूमि में बनने वाली भव्य श्रीराम मन्दिर तीन मंजिला होगी जिसके दूसरे मंजिल पर राम दरबार होगा। 100 नदियों के पानी व 02 हजार तीर्थस्थलों की मिट्टी मंदिर निर्माण में शामिल की जाएगी। 17 फ़ीट की ऊंचाई व 106 खम्बों पर बनने वाली श्रीराम मंदिर की ऊंचाई 161 फ़ीट, लंबाई 360 फ़ीट, 235 फ़ीट चौड़ी होगी जो पाँच कुर्सीनुमा भव्य पंडाल पर आधारित होगी। उक्त मंदिर निर्माण के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर एक ट्रस्ट भी बनाया गया है जिसकी देखरेख में बड़ी कंपनी द्वारा श्रीराम मंदिर का भव्य निर्माण होगा। 05 अगस्त को प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जहां भूमि पूजन किया है वहीं मंदिर का निर्माण किया जाएगा।

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