सपा में कसीम अशरफ को लेकर गरमाई सियासत
अम्बेडकरनगर: समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष जंग बहादुर यादव ने आखिरकार टांडा नगर अध्यक्ष सैय्यद कसीम अशरफ का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है जिसके बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। खास बात यह है कि सैय्यद कसीम अशरफ ने गत दिनों जिलाध्यक्ष को संबोधित अपने त्यागपत्र में पार्टी में बने रहने की बात तो कही थी, लेकिन अपने ऊपर दर्ज एक मुकदमे में पार्टी द्वारा अपेक्षित सहयोग न मिलने पर नाराज़गी भी लिखित रूप से जताई थी।
इस्तीफे में दर्ज इस नाराज़गी ने पूरे घटनाक्रम को और राजनीतिक बना दिया है। माना जा रहा है कि यह सिर्फ स्वास्थ्य कारणों तक सीमित मामला नहीं, बल्कि संगठन के भीतर चल रहे समीकरणों की भी झलक है। हालांकि इस बीच सपा जिलाध्यक्ष जंग बहादुर यादव ने फोन वार्ता में साफ कहा कि भविष्य में सैय्यद कसीम अशरफ को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
जिलाध्यक्ष के इस बयान के बाद मामला और दिलचस्प हो गया है। एक तरफ त्यागपत्र में मुकदमे को लेकर असंतोष, दूसरी तरफ बड़ी जिम्मेदारी का संकेत — इससे साफ है कि पार्टी कसीम अशरफ को नाराज़ नहीं करना चाहती और उन्हें नई भूमिका में साधने की तैयारी है।
सूत्रों की मानें तो दो दशक से टांडा की सियासत में मजबूत पकड़ रखने वाले कसीम अशरफ को नगर अध्यक्ष पद का इस्तीफा मंज़ूर कर संगठनात्मक फेरबदल के तहत जिला या अन्य अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। समर्थकों का भी कहना है कि इस्तीफा अंत नहीं बल्कि नई राजनीतिक पारी की शुरुआत हो सकता है।
फिलहाल सपा खेमे में यह चर्चा तेज है कि नाराज़गी के बाद भी नेतृत्व ने “बड़ी जिम्मेदारी” का संकेत देकर संदेश दे दिया है कि कसीम अशरफ पार्टी के लिए अभी भी अहम हैं। अब सबकी निगाहें इस पर टिक गई हैं कि उन्हें कौन सी नई जिम्मेदारी देकर सपा नया सियासी संतुलन बनाती है।










