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नज़ीर बन सकता है नगर पंचायत चुनाव याचिका पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्रशासन को भी झटका

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चेयरमैन ओमकार गुप्ता को हाईकोर्ट से मिला न्याय लेकिन वित्तीय व प्रशासनिक मामले की याचिका पर फैसला बाकी

चर्चा: कानूनी प्रक्रिया की त्रुटि या जनादेश की जीत !

अम्बेडकरनगर: नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा की राजनीति गत कई महीनों से कानूनी उलझनों में फंसी नज़र आ रही है। अध्यक्ष की शक्तियों को सीज़ व अध्यक्ष पद को लेकर विवाद, याचिकाएं, आदेश और प्रशासनिक कब्जे की कार्यवाहियों ने स्थानीय राजनीति गरमाए रखा है। एक तरफ उच्च न्यायालय ने निकाय चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार करने को आपत्तिजनक बताते हुए खारिज़ कर दिया है तो वहीं प्रशासन को भी झटका देते हुए प्रशासनिक कब्ज़ा को स्वतः समाप्त कर दिया है। उक्त आदेश से चेयरमैन ओमकार गुप्ता को जहां बड़ी राहत मिली है वहीं उनकी शक्तियों पर लगी रोक वाली याचिका पर अभी पूर्ण फैसला नहीं आ सका है।
बताते चलेंकि नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा के अध्यक्ष ओमकार गुप्ता के खिलाफ दायर एक याचिका पर जिला न्यायाधीश/अपर जिला जज एफटीसी-1 ने सुनवाई करने के बाद गत 04 नवम्बर को निकाय चुनाव शून्य कर दिया था जिससे राजनीतिक गलियारे में हड़कम्प मच गया था।
इससे पूर्व एक अन्य याचिका में अदालत ने नगर पंचायत किछौछा के अध्यक्ष ओमकार गुप्ता की शक्तियों पर रोक लगा दिया था हालांकि उक्त आदेश पर ओमकार गुप्ता रोक लगवाने में सफल भी हो गए थे परंतु निकाय चुनाव परिणाम वाली याचिका में “चुनाव शून्य” का आदेश होने के बाद दूसरी याचिका कर्ताओ ने पुनः अपील करते हुए अदालत को बताया कि ‘जब पद ही शून्य हो गया है तो ऐसे में शक्तियों को बहाल नहीं रखा जा सकता है’, जबकि ओमकार गुप्ता के अधिवक्ता ने दावा किया कि उच्च न्यायायल में अपील की गई है जिसके बाद ही कोई फैसला दिया जाए। उक्त मामले में न्यायालय ने याचिका को मूल वाद पर ला कर खड़ा कर दिया तथा अग्रिम तिथि नियत कर दी।
उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने सीमा अधिनियम की धारा 5 के प्रावधान लागू नहीं होंगे, नगर पालिका अधिनियम की धारा 20 के तहत चुनाव याचिका दायर की गई। विद्वान अतिरिक्त जिला द्वारा पारित दिनांक 04 नवम्बर 2025 का आपत्तिजनक आदेश जज ने लिमिटेशन एक्ट के सेक्शन 5 के तहत एप्लीकेशन को मंजूरी दे दी है। कानून में टिक नहीं पाता और इसे रद्द किया जाता है। साथ ही साथ 15 नवम्बर को प्रशासनिक नियुक्ति को भी निरस्त कर दिया। कानूनी विशेषज्ञों की राय है कि हाईकोर्ट का उक्त फ़ैसला नजीर बन सकता है जिसमें न्यायमूर्ति ने निकाय चुनाव परिणाम की याचिका व फैसले को आपत्तिजनक माना है।
नगर पंचायत ओमकार गुप्ता को हाईकोर्ट ने जहां बहुत बड़ी राहत दे दिया है वहीं जिला स्तर पर दायर शक्तियों पर रोक वाली याचिका की सुनवाई बाकी है जिसमें ओमकार गुप्ता के अधिवक्ता का दावा है कि बिना प्रक्रिया को पूरी किये ही उनकी शक्तियों पर रोक लगाना कानून के विपरीत है, हालांकि अब सभी की निगाहें उक्त याचिका के निर्णय पर टिकी हुई है।
राजनीतिक गलियारे में नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा के अध्यक्ष को लेकर काफी उठापटक चल रही है, अध्यक्ष के समर्थकों ने हाईकोर्ट के फैसले को जहां जनादेश की जीत बताया है वहीं अन्य लोगों का मानना है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन ना करना ही त्रुटि बन गया है।


बहरहाल उच्च अदालत ने जिला जज द्वारा गत 04 नवम्बर को दिए गए आदेश को सीधे-सीधे आपत्तिजनक और अस्थिर करार दे दिया तथा प्रशासनिक व्यवस्था को समाप्त कर दिया है जिससे नगर पंचायत अध्यक्ष ओमकार गुप्ता की कुर्सी वैधानिकता लौट आई है हालांकि शक्तियों पर रोक वाली याचिका के फैसले का सभी को बड़ी बेकरारी के साथ इंतज़ार है। (विशेष रिपोर्ट:आलम खान एडिटर-मान्यता प्राप्त पत्रकार)-8090884090)

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