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तनाव, अवसाद और सोशल मीडिया के जाल से निकलने का मिला मंत्र, मेडिकल कॉलेज में गूंजी ‘मेंटल हेल्थ’ की पाठशाला

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अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: फखरे आलम खान एडिटर-मान्यता प्राप्त) बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव और सोशल मीडिया की आभासी दुनिया युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही है। ऐसे दौर में महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज, सद्दरपुर ने छात्रों और स्वास्थ्यकर्मियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।

प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश यादव के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कई अहम पहलुओं पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने बताया कि अवसाद (डिप्रेशन) और एंजायटी जैसी समस्याएं अब केवल किसी विशेष आयु वर्ग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर वर्ग और हर उम्र के लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं।

डॉ. अमित ने कहा कि मानसिक बीमारियां कोई कमजोरी नहीं बल्कि चिकित्सकीय स्थिति हैं, जिनका समय रहते उपचार और परामर्श के माध्यम से समाधान संभव है। उन्होंने छात्रों को तनाव के शुरुआती संकेत पहचानने, जरूरत पड़ने पर मदद लेने और आत्महत्या जैसी घटनाओं की रोकथाम के लिए जागरूक रहने का संदेश दिया।

कार्यक्रम में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव, व्यवहारिक बदलाव, मानसिक दबाव और आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न चुनौतियों पर भी खुली चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने योग, ध्यान, सकारात्मक सोच और नियमित काउंसलिंग को मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे प्रभावी हथियार बताया।

संवादात्मक सत्र के दौरान छात्र-छात्राओं ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े अनेक सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने सरल और व्यावहारिक तरीके से जवाब दिया। प्रतिभागियों ने विषय के प्रति गहरी रुचि दिखाते हुए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और संवेदनशील समाज बनाने का संकल्प भी लिया।कार्यक्रम में गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ नर्सिंग के छात्र-छात्राओं के साथ एमबीबीएस के विद्यार्थियों ने भी सक्रिय भागीदारी की। फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के डॉ. आशीष यादव, सीनियर नर्सिंग ऑफिसर कुसुमलता, बीना, उर्मिला, मिथिलेश कुमारी एवं अनीता देवी तथा नर्सिंग ऑफिसर सविता मौर्य, चंदा और अलमारा की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम को सफल बनाने में टीचर्स एसोसिएशन, काउंसलर विनोद कनौजिया, स्टाफ नर्स अनुराग त्रिपाठी, डाटा मैनेजर स्वीटी शर्मा, आउटसोर्सिंग कर्मचारी सुरेश, तथा एल.टी.-1 हाल के हिमांचल एवं राजित राम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह आयोजन केवल एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं बल्कि युवाओं को यह संदेश देने का प्रयास था कि “मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शारीरिक स्वास्थ्य, और मदद मांगना कमजोरी नहीं बल्कि समझदारी है।”

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