अम्बेडकरनगर: प्रशासनिक लापरवाही का एक और गंभीर मामला सामने आया है। टाण्डा नगर क्षेत्र के मोहल्लाह काजीपुरा में जर्जर हो चुके विशालकाय पाकड़ के पेड़ को हटवाने के लिए स्थानीय लोग महीनों से एसडीएम कार्यालय और नगर पालिका टांडा के चक्कर काटते रहे, लिखित शिकायतें देते रहे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने खतरे को नजरअंदाज कर दिया। आखिरकार मंगलवार देर रात तेज आंधी और बारिश के बीच वही पेड़ धराशायी हो गया और झीनने पुत्र अब्दुल जलील के मकान पर जा गिरा, जिससे मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पेड़ पूरी तरह जर्जर था और कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता था। इसके बावजूद नगर पालिका और प्रशासन ने समय रहते उसे कटवाने या हटवाने की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। नतीजा यह हुआ कि रात के अंधेरे में अचानक पेड़ गिर पड़ा और लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
हैरानी की बात यह है कि जिस खतरे की जानकारी प्रशासन को पहले से थी, उसी खतरे को अनदेखा किया गया। सवाल यह उठ रहा है कि यदि पेड़ गिरने से किसी की जान चली जाती तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता? क्या शिकायतों पर कार्रवाई के लिए किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा था।
घटना के बाद नगर पालिका की टीम मौके पर पहुंची और गिरे हुए पेड़ को हटाने की कवायद शुरू की, लेकिन लोगों का कहना है कि हादसे के बाद की सक्रियता का कोई मतलब नहीं है। यदि अधिकारियों ने समय रहते कदम उठाया होता तो झीनने का मकान क्षतिग्रस्त नहीं होता और लोगों की जान जोखिम में नहीं पड़ती।
काजीपुरा के निवासियों में नगर पालिका और प्रशासन के खिलाफ भारी रोष है। लोगों का कहना है कि उनकी शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया गया और जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए रहे। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि मामले की जांच कर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा क्षतिग्रस्त मकान के मालिक को उचित मुआवजा दिया जाए।
गनीमत रही कि इस बार सिर्फ मकान क्षतिग्रस्त हुआ, लेकिन यह हादसा प्रशासन के लिए एक बड़ा सवाल छोड़ गया है—क्या कार्रवाई हमेशा दुर्घटना के बाद ही होगी या फिर किसी घटना की पूर्व सूचना पर ही प्रशासन को सतर्क हो जाना चाहिए था।




