अम्बेडकरनगर: नगर पंचायत इल्तिफ़ातगंज में विकास के नाम पर सरकारी धन की खुली बर्बादी और घोर लापरवाही का सनसनीखेज मामला सामने आया है। टाण्डा-इल्तिफ़ातगंज मुख्य सड़क से मीरापुर गाँव को जोड़ने के लिए बनाई गई नई सड़क पर हाईटेंशन तार का खम्भा हटाए बिना ही नई सीसी सड़क का निर्माण करा दिया गया। नतीजा—सड़क के बीचोंबीच खड़ा खम्भा, जिससे चार पहिया वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है।
यह सड़क लार्ड बुद्धा स्कूल के पास से कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल के सहारे गुजरती है। जुनेद के घर से बिलकीस के घर तक बनाई गई यह नई सीसी सड़क ग्रामीणों के लिए राहत नहीं, बल्कि खतरे का सबब बन गई है। बीच रास्ते में खम्भा होने से दुर्घटना की आशंका हर वक्त बनी रहती है। एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपात सेवाओं के लिए यह मार्ग मौत का रास्ता साबित हो सकता है—यही इस तथाकथित ‘विकास’ की सच्चाई है।
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि अवर अभियंता (जेई) ने बिना मौके का निरीक्षण किए ही काम को हरी झंडी दे दी। चेयरमैन और ईओ पर भी गंभीर आरोप हैं कि उन्हें जनहित से कोई सरोकार नहीं, सिर्फ कमीशन की चिंता है। ठेकेदार की तो बल्ले-बल्ले—घटिया प्लानिंग और भारी खामी के बावजूद काम पूरा दिखाकर भुगतान की तैयारी!
लाखों रुपये की लागत से बना यह मार्ग अब सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है। चेयरमैन मामले में विद्युत विभाग को जिम्मेदार बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब खम्भा हटाया ही नहीं गया, तो सीसी सड़क बनी कैसे? बिना समन्वय और अनुमति के काम पास किसने किया? जिम्मेदारी तय होगी या फिर फाइलों में सब ‘ठीक’ दिखाकर मामला दबा दिया जाएगा?
स्थानीय लोगों में जबरदस्त आक्रोश है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही खम्भा हटाकर सड़क को दुरुस्त नहीं किया गया और दोषी अफसरों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत और आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। यह मामला नगर पंचायत के दावों पर करारा तमाचा है—जहां कागजों में सब सही और जमीन पर जनता की जान जोखिम में डाली जा रही है।





