अम्बेडकरनगर: उत्तर प्रदेश की सियासत में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। टाण्डा से विधायक रहे प्रदेश के पूर्व कैबिनेट शिक्षा मंत्री डॉ. मसूद अहमद खान ने कांग्रेस को अलविदा कहकर आज़ाद समाज पार्टी का दामन थाम लिया है। प्रदेश मुख्यालय में आयोजित समारोह में उन्होंने पार्टी के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद की मौजूदगी में विधिवत सदस्यता ग्रहण की।
सदस्यता लेने के बाद डॉ. मसूद अहमद ने साफ संदेश दिया कि अब राजनीति केवल सत्ता की नहीं, बल्कि “भागीदारी और हक की लड़ाई” की होगी। उन्होंने दलित–मुस्लिम एकजुटता को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि वंचित समाज की साझा राजनीतिक ताकत ही बदलाव का रास्ता तैयार करेगी।
डॉ. मसूद के इस फैसले को कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पूर्वांचल, खासकर अम्बेडकरनगर और टाण्डा की राजनीति में उनके प्रभाव को देखते हुए आज़ाद समाज पार्टी को नई ऊर्जा मिलने की चर्चा शुरू हो गई है।

अब राजनीतिक गलियारों में सवाल यही है कि क्या डॉ. मसूद अहमद की नई पारी दलित–मुस्लिम समीकरण को नई दिशा देगी और आने वाले चुनावों में बड़े राजनीतिक समीकरण बदलने का कारण बनेगी।




