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39.99 लाख का खेल! तालाब का सौंदर्यीकरण अधूरा, भुगतान पर सभासद ने खड़े किए सवाल

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90 दिन की मियाद खत्म, महीनों बाद भी काम अधूरा—ठेकेदार की ‘बहानेबाजी’ पर भड़के सभासद, बोले- जांच हो तो खुल सकती है बड़ी गड़बड़ी

अम्बेडकरनगर। नगर पालिका परिषद टांडा में 39.99 लाख रुपये के अलीमुद्दीनपुर तालाब सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर शिकायत ने विकास कार्यों की निगरानी और भुगतान व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड संख्या-11 के सभासद राकेश कुमार गुप्ता ने नगर पालिका अध्यक्ष/अधिशासी अधिकारी को पत्र देकर मामले में तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है।

सभासद के शिकायती पत्र में कहा गया है कि पं. दीनदयाल उपाध्याय आदर्श नगर पंचायत योजना के तहत अलीमुद्दीनपुर तालाब के सौंदर्यीकरण का कार्य लगभग 39.99 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत हुआ था। ठेकेदार को काम पूरा करने के लिए महज 90 दिन की समय-सीमा दी गई थी। लेकिन समय-सीमा बीत जाने के बाद भी काम अधूरा पड़ा है।

90 दिन में होना था काम, समय बीता तो भी नहीं बदली तस्वीर!

सवाल सीधा है—जब सरकारी योजना के तहत काम पूरा करने की समय-सीमा तय थी, तो आखिर 90 दिन की मियाद खत्म होने के बाद भी ठेकेदार पर शिकंजा क्यों नहीं कसा गया? सभासद का आरोप है कि संबंधित ठेकेदार अलग-अलग बहाने बनाकर काम को अधूरा छोड़ रहा है। इससे नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर विकास कार्यों की निगरानी कौन कर रहा है और समय-सीमा की जिम्मेदारी किसकी है?

काम अधूरा, भुगतान पूरा? उठे सबसे बड़े सवाल

शिकायत में यह भी कहा गया है कि अब तक जितना काम कराया गया, उसके सापेक्ष विभाग से भुगतान भी प्राप्त कर लिया गया है। यही बिंदु पूरे मामले को और गंभीर बना देता है।

अगर भुगतान हो चुका है तो—

काम की वास्तविक मात्रा कितनी है?
मौके पर कितना निर्माण हुआ?
भुगतान किस आधार पर किया गया?
एमबी (मेजरमेंट बुक) में क्या दर्ज है?
तकनीकी अधिकारियों ने कार्य का सत्यापन कैसे किया? इन सवालों का जवाब अब नगर पालिका प्रशासन को देना होगा।

सभासद ने मांगा तकनीकी और वित्तीय ‘एक्स-रे’

सभासद ने मांग की है कि मौके पर तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और अब तक हुए कार्य तथा उसके सापेक्ष किए गए भुगतान का तकनीकी एवं वित्तीय सत्यापन कराया जाए। साथ ही शेष कार्य तत्काल पूरा कराने और अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई, भुगतान की वसूली तथा जरूरत पड़ने पर ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की मांग की गई है।

लापरवाही हुई तो जिम्मेदार अफसर भी जांच के घेरे में आएं

मामला सिर्फ ठेकेदार तक सीमित नहीं है। सभासद ने कार्य में हुई कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की भी मांग की है। यानी शिकायत सीधे तौर पर यह सवाल खड़ा करती है कि अगर ठेकेदार समय पर काम नहीं कर रहा था तो जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?

अब देखना यह है—तालाब की जांच होगी या मामला फाइलों में दब जाएगा?

करीब 40 लाख रुपये की सरकारी लागत वाला काम निर्धारित समय के बाद भी अधूरा पड़ा होने के आरोप ने नगर पालिका प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन मौके पर पहुंचकर निर्माण की ईंट-ईंट और भुगतान की पाई-पाई का हिसाब खंगालेगा या शिकायत भी दूसरी सरकारी फाइलों की तरह धूल फांकती रहेगी।

हालांकि शिकायती पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि प्रशासन निष्पक्ष तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराता है, तो ही स्पष्ट होगा कि मामला महज कार्य में देरी का है या सरकारी धन के भुगतान और निर्माण की गुणवत्ता से जुड़ी कोई गंभीर अनियमितता भी सामने आती है।

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