ताज तिराहा पर जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी व नातिया मुकाबला, 13 अंजुमनों ने लिया हिस्सा
मरकज़ अंजुमन ने जुलूसे मोहम्मदी में अदब से चलने वाली अंजुमनों को किया समानित
अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान एडिटर – मान्यता प्राप्त पत्रकार) पैगम्बरे इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा ﷺ की विलादत के मुबारक मौके पर टाण्डा नगर में जश्न-ए-विलादत की रौनक चरम पर दिखाई दी। कस्बा ताज तिराहा पर अंजुमन मुहब्बाने मुस्तफा की ओर से पूर्व वर्षों की परंपरा के अनुसार जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी एवं भव्य नातिया मुकाबले का आयोजन किया गया, वहीं दूसरी ओर मरकज अंजुमन गुलामाने मुस्तफा ने कस्बा जामा मस्जिद के निकट नातिया मुजाहरा एवं जुलूसे मोहम्मदी में अदब व अनुशासन के साथ शामिल होने वाली अंजुमनों का सम्मान समारोह आयोजित कर माहौल को और यादगार बना दिया।
ताज तिराहा पर आयोजित जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी का संचालन मौलाना अजहर मंजरी ने किया। इस दौरान मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे अल्लामा मौलाना मुफ्ती अंजुम रजा हक्कानी ने अपनी तकरीर के माध्यम से पैगम्बरे इस्लाम ﷺ की विलादत, सीरत और उनके पैगाम पर विस्तार से रोशनी डाली। उनकी तकरीर को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
खास बात यह रही कि नगर क्षेत्र के कस्बा पूरब निवासी और सुन्नी अलजमात के लिए अपना जीवन वक्फ करने वाले मरहूम मौलाना अय्यूब कुरैशी के पोते मुफ्ती अंजुम रजा हक्कानी पहली बार टाण्डा नगर के ताज तिराहा पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी प्रभावशाली तकरीरों के लिए पहचान बना चुके मुफ्ती अंजुम रजा हक्कानी ने जश्न-ए-विलादत के मौके पर लोगों को महत्वपूर्ण संदेश दिया।
13 अंजुमनों के बीच हुआ कड़ा नातिया मुकाबला
नातिया मुकाबले में कुल 13 अंजुमनों ने हिस्सा लेकर अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। मुकाबले में अंजुमन सैदाए रसूल काजीपुरा और अंजुमन बहारे तैयबा काजीपुरा के बीच कड़ा मुकाबला हुआ और दोनों के बराबर रहने पर परिणाम टाई रहा। इसके बाद कुर्रा-अंदाजी यानी पर्ची के माध्यम से पुरस्कारों का फैसला किया गया।
कुर्रा-अंदाजी के बाद अंजुमन सैदाए रसूल काजीपुरा को प्रथम, अंजुमन बहारे तैयबा काजीपुरा को द्वितीय तथा अंजुमन इस्लामिया मुबारकपुर को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अलावा प्रतियोगिता में शामिल अन्य अंजुमनों को भी सम्मानित किया गया।
ताज तिराहा पर आयोजित भव्य नातिया मुकाबले का संचालन मौलाना शईफुलहक सुब्हानी ने अपने शानदार अंदाज में किया, जिस पर उन्हें जमकर वाहवाही मिली। कार्यक्रम को सफल बनाने में अंजुमन मुहब्बाने मुस्तफा के कार्यकर्ता पूरी सतर्कता और मुस्तैदी के साथ जुटे रहे।
अदब से चलने वाली अंजुमनों का हुआ सम्मान
उधर, कस्बा जामा मस्जिद के निकट मरकज अंजुमन गुलामाने मुस्तफा की ओर से नातिया मुजाहरा एवं जुलूसे मोहम्मदी में अदब और अनुशासन के साथ चलने वाली अंजुमनों के सम्मान में समारोह आयोजित किया गया।
समारोह में जुलूसे मोहम्मदी के दौरान अनुशासन, अदब और मर्यादा के साथ चलने वाली अंजुमनों की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया। नातिया मुजाहरे में पहला पुरस्कार नूरे हक सकरावल पश्चिम को मिला।
कार्यक्रम में मदरसा मंजरे हक के प्रबंधक हाजी अशफाक अंसारी, सेक्रेटरी हाजी शमीम अख्तर तथा अदारे शरैय्या के मौलाना फैय्याजुद्दीन मंजरी ने मरकज अंजुमन के प्रयासों की सराहना करते हुए अदब से चलने वाली अंजुमनों को मुबारकबाद पेश की।कार्यक्रम की अध्यक्षता मरकज अंजुमन के अध्यक्ष आरिफ खान ने की, जबकि संचालन आराफात कामिल शोबी ने किया। अंत में मरकज अंजुमन के उपाध्यक्ष फजले रब अंसारी ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
दोनों आयोजनों में जश्न-ए-विलादत की अकीदत, नातिया कलाम की मिठास और अनुशासन का संदेश साफ दिखाई दिया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य पैगम्बरे इस्लाम ﷺ की सीरत और उनके बताए रास्ते के संदेश को आम लोगों तक पहुंचाना तथा समाज में मोहब्बत, भाईचारे और अदब की भावना को मजबूत करना है।





