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सैकड़ों किसानों की फसल जलमग्न – खानापूर्ति में जुटे अधिकारी – अन्नदाताओं में आक्रोश

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अन्नदाताओं का नहीं रुक रहा है आँसू – एसडीएम व सीएम से शिकायत के बाद भी नहीं मिली राहत

मात्र 8 इंच की पाइप लगाने के प्रयास का किसान कर रहे हैं विरोध

अम्बेडकरनगर: समाचार में दिखाई दे रहा फ़ोटो किसी नदी या तालाब का नहीं बल्कि विकास खंड बसखारी के सुलेमपुर परसावां गाँव का है जहां विगत दिनों हुई मूसलाधार बारिश के बाद सैकड़ों बीघा धान की फसल जलमग्न हो गई।

किसानों ने उपजिलाधिकारी टांडा सहित मुख्यमंत्री से शिकयत कर न्याय की गोहार लगाई है। बर्बाद हो रही फसलों को देख कर अन्नदाताओं का आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहा है। ब्लाक स्तरीय अधिकारी खानापूर्ति का मात्र दिखावा करते नज़र आ रहे हैं जिससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है।

एसडीएम टांडा को दिया गया ज्ञापन

टांडा तहसील के बालक बसखारी में स्थित ग्राम सभा सुलेमपुर परसावां में गत दिनों हुई भारी वर्षा के बाद सैकड़ों बीघा धान की फसल डूब गई है। ग्रामीणों ने बताया कि उक्त गाँव के वर्षा का पानी पीडब्ल्यूडी की सड़क पार कर घाघरा नदी में जाता था लेकिन सड़क पर बनी पुलिया के सामने गाँव के ही राजितराम वर्मा द्वारा राइस मिल व धर्म कांटा बनवा लिया गया और उसकी लिखित सूचना ग्राम व ब्लाक स्तरीय अधिकारियों को नहीं दिया जिसके कारण 800 बीघा खेत में पानी रुक गया और फसलें बर्बाद होने लगी। ग्रामीणों की शिकायत के बाद पहुंचे एडीओ पंचायत द्वारा मात्र 8 इंच की पाइप के सहारे पानी निकालने का प्रयास किया जा रहा था जिसे आक्रोशित ग्रामीणों ने रुकवा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि पहले तीन फीट की पाइप थी जिससे पानी निकलता था लेकिन अब मात्र 8 इंच की पाइप लगाई जाएगी तो पानी निकलने में एक सप्ताह से अधिक समय लग जायेगा। ग्रामीणों ने मांग किया कि तत्काल 2 से 3 फ़ीट मोटी पाइप लगा कर जलमग्न हुई फसल को बचाने की दिशा में काम किया जाए।
सुलेमपुर परसावां के दर्जनों ग्रामीणों ने टांडा उपजिलाधिकारी को दो बार लिखित प्रार्थना पत्र देते हुए न्याय की गोहार लगाई और मुख्यमंत्री पोर्टल के सहारे भी अन्नदाताओं ने अपनी फसल को बर्बाद होने से बचाने की गोहार लगाई है।
बसखारी ब्लाक के बीडीओ ने बताया कि फसलों में पानी भरने की सूचना प्राप्त हुई है जिसको निकालने की व्यवस्था एडीओ पंचायत की निगरानी में कई जा रही है।
बहरहाल अगर ब्लाक स्तरीय अधिकारी द्वारा 8 इंच की पाइप के बजाय 2 से 3 फ़ीट की मोटी पाइप लगा कर जल निकासी कराई जाए तो जलमग्न हुई फसल को अभी भी बचाया जा सकता है। वीडियों नीचे देखें।

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