अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान एडिटर इन चीफ -मान्यता प्राप्त पत्रकार) जिले में बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा को लेकर प्रशासनिक रवैये पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफ महरुआ में प्रतिमा स्थापना को लेकर माहौल संवेदनशील बताकर सख्ती दिखाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर अकबरपुर तहसील के ग्रामसभा भगवानपुर में सरकारी पंचायत भवन के भीतर ही बिना अनुमति प्रतिमा स्थापित कर दी गई—और प्रशासन को भनक तक नहीं लगी, या फिर अनदेखी की गई लेकिन ग्रामीणों की शिकायत के बाद आखिरकार मामला गर्म हो गया है।

पंचायत भवन बना ‘निजी फैसला’
ग्रामीणों का आरोप है कि 13 अप्रैल 2026 की रात पंचायत भवन परिसर में चुपचाप प्रतिमा स्थापित कर दी गई। यह वही पंचायत भवन है जो सार्वजनिक संपत्ति है, लेकिन बिना प्रशासनिक आधिकारिक स्वीकृति और प्रशासनिक अनुमति के इस तरह का कदम उठाया गया।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल कानून के पालन को लेकर है। Supreme Court of India के स्पष्ट निर्देश हैं कि— किसी भी सार्वजनिक स्थान पर प्रतिमा स्थापित करने से पहले प्रशासनिक अनुमति जरूरी है, बिना अनुमति की गई स्थापना अवैध मानी जाएगी और स्थानीय प्रशासन इसकी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता है। इसके बावजूद अगर सरकारी भवन के अंदर ही नियमों की अनदेखी होती है, तो यह सीधा-सीधा आदेशों की अवहेलना है।
🔥“एक जिला, दो कानून”
महरुआ में जहां हर कदम पर प्रशासन सख्ती दिखा रहा है, वहीं भगवानपुर में वही नियम हवा में उड़ते नजर आ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह चयनात्मक कार्रवाई है—जहां विवाद दिखा, वहां कानून; जहां चुप्पी मिली, वहां छूट,
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायत सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। अब बड़ा सवाल यही है— क्या प्रशासन इस ‘दोहरी नीति’ पर खुद जवाब देगा या फिर मामला भी बाकी फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
यह विवाद सिर्फ एक प्रतिमा का नहीं, बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता और कानून के समान पालन का है। अगर एक ही जिले में नियम अलग-अलग तरीके से लागू होंगे, तो सवाल उठना लाजिमी है।








