अम्बेडकरनगर: शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कागजों में एक ऐसा छात्र कक्षा 8 उत्तीर्ण कर गया, जिसका जन्म ही अभी नहीं हुआ है। टांडा शिक्षा क्षेत्र के एक कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय से जारी ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) में छात्र नीरज की जन्मतिथि 25 जून 2026 दर्ज की गई है, जबकि उसी टीसी में उसे 30 मार्च 2026 को कक्षा 8 पास दिखाया गया है। यानी कागजों के हिसाब से छात्र ने जन्म लेने से करीब तीन महीने पहले ही परीक्षा पास कर ली।
विकास खंड टांडा के ग्राम अवसनपुर निवासी मायावती और मायाराम के पुत्र नीरज को जब यह टीसी दी गई और परिजन दूसरे विद्यालय में दाखिले के लिए पहुंचे, तो वहां के शिक्षक इस विवरण को देखकर हैरान रह गए। उन्होंने तुरंत अभिभावक को इस बड़ी गड़बड़ी की जानकारी दी। इसके बाद जब पिता मायाराम ने संबंधित विद्यालय की प्रधानाध्यापिका से संपर्क किया, तो जवाब मिला कि काम के दबाव में ऐसी “क्लरिकल मिस्टेक” हो जाती है और बाद में सुधार कर दिया जाएगा।

हालांकि यह ‘छोटी गलती’ अब बड़ा सवाल बन चुकी है कि क्या शिक्षा विभाग में दस्तावेजों की जांच इतनी लापरवाही से हो रही है कि जन्म से पहले ही छात्र पास घोषित हो जा रहे हैं। मामले में खंड शिक्षा अधिकारी मनीषा ओझा ने कहा कि संबंधित विद्यालय से स्पष्टीकरण मांगा गया है और अभिभावक को सही विवरण के साथ नया टीसी जारी किया जाएगा। लेकिन इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। महाभारत में अभिमन्यु ने मां के गर्भ में चक्रव्यूह भेदना सीखा था, लेकिन टांडा का यह ‘कलयुग का अभिमन्यु’ तो जन्म से पहले ही 8वीं पास कर गया। अब सवाल यह है कि यह तकनीकी गलती है या जिम्मेदारी से भागते सिस्टम की एक और मिसाल।








