अम्बेडकरनगर: एक ओर रंग, गुलाल और फगुआ गीतों की गूंज… दूसरी ओर शोक और सन्नाटा। टाण्डा और जुड़वा कस्बा मुबारकपुर में होली का पारंपरिक जुलूस पूरे हर्षोल्लास के साथ निकला, लेकिन छज्जापुर निवासी लकड़ी व्यापारी सुरेंद्र मांझी की निर्मम हत्या की खबर ने उत्सव की रफ्तार थाम दी। पुराना रामलीला मैदान में प्रतिवर्ष होने वाला होली मिलन समारोह दो मिनट का मौन रखकर स्थगित कर दिया गया।
03 मार्च को फावड़े से काटकर की गई सुरेंद्र मांझी की हत्या ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। इसी दुखद घटना के कारण आयोजन स्थल पर मौजूद ईश्वर दयाल जायसवाल, सरदार त्रिलोक सिंह, अजीजुर्रहमान अंसारी, बजरंगी सोनी, नृपेंद्र सिंह श्रीवास्तव सहित अन्य लोगों ने होली मिलन समारोह स्थल पर शोक व्यक्त करते हुए कार्यक्रम निरस्त करने का निर्णय लिया। रंगों के पर्व पर शोक की यह छाया पूरे नगर में चर्चा का विषय बनी रही।
इधर टाण्डा नगर क्षेत्र में श्रीझारखंड महादेव, छज्जापुर से पारंपरिक मार्गों पर भव्य होली जुलूस निकाला गया। श्रद्धालु फगुआ गीतों के साथ रंग-गुलाल उड़ाते हुए झूमते नजर आए। जुलूस पुनः मंदिर परिसर पहुंचकर सकुशल संपन्न हुआ। ऐतिहासिक होली जुलूस में रामजीत साहू, दिनेश मौर्य, अजय श्रीवास्तव, रघुनाथ यादव, घिसियावन मौर्य, राकेश सोनकर, गिरिराज मद्धेशिया, ओम शंकर सोनी, कृष्ण कुमार कसौधन, प्रदीप मौर्य एडवोकेट, कमल कपूर, अमर शंकर वर्मा, दीपक केडिया, रमेश गुप्ता, शैलेश यादव, पप्पू यादव आदि सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
वहीं मुबारकपुर में श्री पंच शिव मंदिर, पुलिस चौकी से प्रारंभ हुआ जुलूस पूरे उत्साह के साथ विभिन्न मार्गों से गुजरता हुआ पुनः मंदिर पहुंचा। राजा के रथ पर सवार अजय सोनी और सुनील मद्धेशिया आकर्षण का केंद्र रहे। जगह-जगह अंगवस्त्र, मिष्ठान और अबीर-गुलाल से उनका स्वागत किया गया। पिंटू जायसवाल, विशाल मोदनवाल, संदीप कुमार मांझी, विक्की चौरसिया सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे।
एक ही दिन दो तस्वीरें सामने आईं—एक रंगों की, दूसरी रक्तरंजित खबर की। होली के उल्लास के बीच उठता सवाल यही रहा कि आखिर कब तक त्योहारों पर अपराध की काली छाया पड़ती रहेगी? प्रशासन के सामने चुनौती केवल शांति व्यवस्था बनाए रखने की नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास को भी सुरक्षित रखने की है।





