मानवाधिकार कार्यकर्ता को अपनी बहू की जान बचाने के लिए देना पड़ा धरना और करना पड़ा सदर विधायक से फोन
निजी क्लिनिक पर बिजी महिला डॉक्टर की इमरजेंसी पर लगी थी ड्यूटी
अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान एडिटर-मान्यता प्राप्त पत्रकार) जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है, अधिकारियों के औचक निरीक्षण में सब चाक चौबंद मिलता है लेकिन हकीकत में आम मरीजों को काजी मशक्कत करनी पड़ती है।
ताज़ा मामला रविवार को तब सामने आया जब मानवाधिकार कार्यकर्ता समाजसेवी मनोज कुमार सिंह अपनी बहू के प्रसव के लिए जिला अस्ताल पहुंचे तो वहां घण्टों मरीज को कोई पूंछने वाला ही नहीं रहा। विभाग के अधिकारियों व ड्यूटी से नदारत डॉक्टरों के पास कई चक्र फोन किया लेकिन आश्वासन के अलावा कोई लाभ नहीं मिला। रविवार रात्रि लगभग 08 बजे प्रसूता की हालत खराब होने लगी और कोई डॉक्टर भी नहीं पहुंचा, जिससे नाराज़ मनोज कुमार सिंह जिला अस्पताल में ही धरना पर बैठ गए। श्री मनोज द्वारा सदर विधायक राम अचल राजभर से शिकायत की गई तो सदर विधायक श्री राजभर द्वारा जिलाधिकारी से शिकायत की गई जिसके बाद इमरजेंसी पर तैनात महिला डॉक्टर संगीता सिंह पहुंची और उन्होंने समाजसेवी मनोज कुमार सिंह पर बरस पड़ी।
श्री मनोज ने बताया कि मुख्य चिकित्सा अधीक्षक व मुख्य चिकित्साधिकारी के कहने के बाद भी इमरजेंसी पर तैनात महिला डॉक्टर संगीता सिंह जिला अस्पताल नहीं आई जबकि जिला अस्पताल से मात्र चन्द कदम की दूरी पर स्थित निजी क्लिनिक पर मरीजों को बुलाती हैं। श्री मनोज ने बताया कि सदर विधायक व जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के कारण उन्हें जिला अस्पताल आना पड़ा और आते ही उन्होंने कहा कि मैं इस्तीफा जेब में तखकर चलती हूँ। काफी दबाव के बाद महिला डॉक्टर संगीता सिंह ने एक बेबी का जन्म कराया।
मानवाधिकार कार्यकर्ता व समाजसेवी मनोज कुमार सिंह ने सोशल मीडिया पर अपना दुखड़ा बयान करते हुए जिला अस्पताल में व्याप्त अवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिला डॉक्टर संगीता सिंह जब हम जैसे लोगों के साथ इस तरह से पेश आती हैं तो आम जनों के साथ उनका क्या रवैया रहता होगा।
बहरहाल जिला अस्ताल में बहुचर्चित महिला डॉक्टर संगीता सिंह की निजी क्लिनिक में मरीजों को बुलाने एवं जिला अस्पताल मरीजों व तीमारदारीन के साथ अभद्रता की चर्चाएं कसर रहती है लेकिन उनपर लगाम कसने की हिम्मत कोई भी नहीं कर पाता है।




