अम्बेडकरनगर जनपद के विशेष न्यायालय (एससी/एसटी एक्ट) में चर्चित आपराधिक मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। विद्वान अधिवक्ता नूरुल ऐन मोमिन की प्रभावी पैरवी के चलते आरोपी रामदीन को न्यायालय ने दोषमुक्त करार दिया।
विशेष न्यायाधीश भारतेन्दु प्रकाश गुप्ता की अदालत ने धारा 323, 504, 506 भादंवि एवं एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(x) के तहत चल रहे मुकदमे में सुनवाई पूरी होने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को बरी करने का आदेश दिया।
मामला वर्ष 2013 का बताया जा रहा है, जिसमें वादी मुकदमा सुखराज बौद्ध ने रामदीन पर आरोप लगाया था कि जब वो शुकुल पट्टी आरा मशीन के पास चाय पी रहा था था उसको रामदीन द्वारा जातिसूचक शब्दों के प्रयोग, मारपीट और जान से मारने की धमकी दिया था। उक्त मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता नूरुल ऐन मोमिन ने तथ्यों, गवाहों की विश्वसनीयता और साक्ष्यों में विरोधाभास को मजबूती से रखा, जिससे अभियोजन की कहानी कमजोर साबित हुई।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोप प्रमाणित न होने के कारण आरोपी को दोषमुक्त किया जाता है। साथ ही आरोपी के जमानती बंधपत्र निरस्त कर दिए गए और उसे नियमानुसार राहत प्रदान की गई।
इस फैसले को अधिवक्ता नूरुल ऐन मोमिन की मजबूत कानूनी रणनीति और प्रभावी दलीलों का परिणाम माना जा रहा है, जिससे आरोपी को लंबे समय बाद न्याय मिला।








