अम्बेडकरनगर: जलालपुर में बुधवार को स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने एक अवैध रूप से संचालित अल्ट्रासाउंड व डायग्नोसिस सेंटर पर छापा मारकर उसे सील कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि सेंटर का लाइसेंस पहले ही निरस्त किया जा चुका था, इसके बावजूद यहां खुलेआम जांच का कारोबार चल रहा था।
जलालपुर उप जिलाधिकारी राहुल गुप्ता के निर्देश पर नायब तहसीलदार हरिराम, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नगपुर के अधीक्षक डॉ. पी.के. बदल और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर दबिश दी। टीम को देखते ही संचालक और स्टाफ मौके से फरार हो गए, जिससे अफरा-तफरी मच गई। निरीक्षण के दौरान अल्ट्रासाउंड मशीन चालू हालत में मिली और कई लोग अपनी जांच व रिपोर्ट के इंतजार में मौजूद थे, लेकिन कोई भी सेंटर के संचालन की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हुआ।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल सेंटर को सील कर दिया। अधीक्षक डॉ. पी.के. बदल ने बताया कि लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद संचालन किया जाना नियमों का खुला उल्लंघन है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
छापेमारी के दौरान एक बड़ा सवाल तब खड़ा हो गया, जब सील किए गए सेंटर के ठीक बगल में संचालित हो रही कथित अवैध पैथोलॉजी लैब पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पैथोलॉजी लंबे समय से बिना मानकों के जांच कर रही है, लेकिन प्रशासन की नजर उस पर अब तक नहीं पड़ी या जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।
इसको लेकर क्षेत्र में नाराजगी है और लोग प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जब एक अवैध सेंटर पर कार्रवाई की गई, तो बगल में चल रही संदिग्ध गतिविधियों पर चुप्पी समझ से परे है। यह स्थिति प्रशासन के दोहरे रवैये की ओर इशारा करती है।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अवैध रूप से संचालित चिकित्सा संस्थानों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। छापेमारी में स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी अनिल त्रिपाठी, फार्मासिस्ट मनोज कुमार समेत अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। फिलहाल अल्ट्रासाउंड सेंटर सील है, लेकिन अब सबकी नजर इस पर है कि बगल की पैथोलॉजी पर प्रशासन कब कार्रवाई करता है।




