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निराश्रितों के लिए भोजन बैंक बना पेट भरने का एक मात्र सहारा

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अम्बेडकरनगर: किसी खास दिन या पर्व पर गरीबों को दान दक्षिणा देने एवं भोजन कराने की परंपरा काफी पुरानी है तथा विशेष अवसरों पर भूखों को भोजन कराने वालों की संख्या समाज में बहुयात है लेकिन वर्षों से प्रतिदिन निर्धारित दो समय पर जरूरतमंदों का पेट भरना काफी मुश्किल काम है लेकिन सरयू तट किनारे आबाद प्राचीन नगरी टांडा में पांच वर्ष से अधिक समय से भोजन बैंक के माध्यम से लगातार लंगर का प्रबंध किया जाता है जो अपने आप में एक ऐतिहासिक व आश्चर्यजनक कार्य है।
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सभी धर्मों के पवित्र ग्रन्थों में भूखों को भोजन करना सबसे बड़ा पुण्य बताया गया है और इसी कारण अधिकांश लोग विशेष अवसरों पर भंडारा व लंगर के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को भोजन कराने का प्रयास करते हैं हालांकि सोशल मीडिया के इस दौरान में सभी कार्यक्रमों की तश्वीरें खूब वायरल भी की जाती हैं लेकिन सेवाहि धर्म: टीम के संस्थापक व सरपरस्त वरिष्ठ समाजसेवी धर्मवीर सिंह बग्गा द्वारा सरयू तट के किनारे स्थित टांडा नगर के मेला गार्डेन में पांच वर्षों से अधिक समय से लगातार दो समय निराश्रितों व असहायों को भोजन बैंक के माध्यम से भोजन कराया जाता है जो निराश्रितों व गरीब असहायों के लिए पेट भरने का एक मात्र सहारा बन चुका है। कोरोना वायरस की महामारी के दौरान सेवाहि धर्म: टीम के साथ धर्मवीर सिंह बग्गा जहां पूरे जनपद में सैनिटाइजर कर रहे थे वहीं सेवाहि धर्म: की एक टीम भोजन बैंक के माध्यम से जरूरतमंदों तक भोजन पैकेट भी पहुंचाने का कार्य अनवरत जारी रहा और विशेष बात ये रही कि उस दौरान श्री बग्गा के सख्त निर्देश के कारण किसी भी जरूरतमंद की फ़ोटो या वीडियो नहीं बनाने दिया गया। लॉकडाउन व अनलॉक के दौरान भोजन बैंक के माध्यम से 50 हज़ार से अधिक लोगों को भरपेट भोजन कराने वाले श्री बग्गा का हौसला जरा भी कम हैं हुआ है और उनके द्वारा पांच वर्ष पूर्व शुरू किया गया भोजन बैंक आज भी बदस्तूर जारी है जिसमें प्रतिदिन दोनों समय निःशुल्क भोजन उपलब्ध रहता है। उक्त भोजन बैंक की विशेष देखभाल श्री बग्गा की धर्मपत्नी स्वयं करती हैं। जानकरी के अनुसार भोजन में प्रति दिन कम से कम एक सामान उनकी पत्नी स्वयं बना कर भोजन बैंक भेजती हैं जबकि अन्य खानों को तैयार करने के लिए विधिवत एक युवक की जिम्मेदारी दी गई है। लॉक डाउन के दौरान भोजन करने वाली की काफी भीड़ उमड़ रही थी लेकिन फ़ोटो खोंचने से श्री बग्गा द्वारा सख्ती से मना किया गया। श्री बग्गा ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान काफी अच्छे परिवार के लोगों के सामने भी दिक्कत आ गई थी और इस मज़बूरी के समय में अगर उनकी कोई फ़ोटो खींचकर मदद करता तो बाद में उस जरूरत मंद व्यक्ति को समाज मे काफी शर्मिंदगी उठाने पड़ सकती थी इसलिए फ़ोटो या वीडियो बनाने से मन किया था।
आपको बताते चलेंकि वरिष्ठ समाजसेवी धर्मवीर सिंह बग्गा द्वारा लगभग दो दशक से सर्वधर्म सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन कर सैकड़ों निर्धन व असहाय बच्चियों का विवाह काफी धूम धाम से संपन्न कराते हैं। श्री बग्गा द्वारा जनपद ही नहीं बल्कि आसपास के जनपदों में भी मिलने वाली लावारिश लाशों का अंतिम संस्कार कराया जाता है जिससे प्रशासन को जहाँ काफी मदद मिलती है वहीं लावारिश शवों को बाइज्जत उनके धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार भी हो जाता है। उक्त महान कार्यों के साथ ही साथ श्री बग्गा द्वारा ‘नेकी की दीवार’ के माध्यम से जरूरत मंदों को निःशुल्क कपड़ा आदि भी उपलब्ध कराया जाता है। मेला गार्डेन के सामने मौजूद ‘नेकी की दीवार’ से कोई भी अपनी जरूरत का कपड़ा आदि बिना किसी से पूंछे हुए निःशुल्क ले जा सकता है और जिसके पास अतरिक्त कपड़ा आदि हो तो उसे वहां पर रख भी सकता है।
बहरहाल पांच वर्षों से अधिक समय से टांडा में संचालित भोजन बैंक लगातार जारी है और लॉक डाउन व अनलॉक के दौरान 50 हज़ार से अधिक लोगों को भरपेट भोजन उपलब्ध करा कर सराहनीय कार्य किया गया है जिसकी प्रशासन ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।

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