अम्बेडकरनगर: कटका थाना क्षेत्र के न्याेरी इलाके में एक अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम में संदिग्ध परिस्थितियों में एक नर्स की मौत ने जिले में धड़ल्ले से चल रहे अवैध अस्पतालों की हकीकत को एक बार फिर उजागर कर दिया है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि सरकार के तमाम आदेशों, निर्देशों और पूर्व में की गई कार्रवाई के बावजूद स्वास्थ्य विभाग इन अवैध अस्पतालों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रख पा रहा है। सवाल उठता है कि किसकी शह पर ये अस्पताल फिर से संचालित हो रहे हैं।
गौरतलब है कि करीब एक वर्ष पूर्व अवैध अस्पतालों में माताओं और नवजातों की लगातार हो रही मौतों के बाद तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजकुमार ने अभियान चलाकर कई अस्पतालों को सील कर दिया था। लेकिन अब वही अस्पताल दोबारा खुलेआम संचालित हो रहे हैं। अमनदीप हॉस्पिटल, मालीपुर रोड यहां एक गरीब मरीज से इलाज के नाम पर हजारों रुपये वसूले गए, लेकिन समुचित इलाज न मिलने से मरीज को दर-दर भटकना पड़ा।
मौर्य हड्डी अस्पताल, नगपुर रोड इस अस्पताल का संचालन एक सरकारी डॉक्टर द्वारा किया जा रहा है, जबकि इलाज अप्रशिक्षित और डिग्रीविहीन स्टाफ द्वारा किया जाता है। पूर्व में इसे सीएमओ की टीम ने सील किया था।
अयोध्या हॉस्पिटल, जलालपुर रोड यहां गलत ऑपरेशन के कारण एक गर्भवती महिला की मौत हुई थी। उस समय भी कार्रवाई कर अस्पताल को सील किया गया था। लेकिन अब यह अस्पताल भी फिर से संचालन में है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन का सारा ध्यान केवल वसूली और दिखावटी चेकिंग तक सीमित है। कई बार ताला लगाने और सील करने के बाद भी ये अस्पताल फिर से खुल जाते हैं, जिससे यह संदेह गहराता है कि कहीं अधिकारी की इन जैसे अस्पतालों से मिलीभगत में तो नहीं है।




