अम्बेडकरनगर: स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूरे जनपद से लगातार मोटी रकम वसूली करने की खबर मिल रही है और इसके पीछे विभाग के मुखिया का ही हाथ बताया जा रहा है। अवैध धन उगाही का ताज़ा मामला सामने आते ही जिलाधिकारी ने टीम गठित कर मजिस्ट्रेटी जांच का आदेश दे दिया लेकिन रिजल्ट क्या होगा, ये देखने वाली बात होगी।

चर्चा है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच के नाम पर पैथोलॉजी सेंटरों एवं निजी अस्पतालों से जमकर अवैध मोटी रकम वसूली की जा रही है परन्तु नदी में रह कर मगरमच्छ से कोई बैर नहीं लेना चाहता है लेकिन एक मामला खुल कर जब सामने आया तो चर्चाएं सच साबित होने लगी।
मामला जलालपुर क्षेत्र में संचालित प्रखर डेंटल क्लीनिक से जुड़ा है, उक्त क्लिनिक के संचालक डॉक्टर सौरभ के भाई सलिल पुत्र सूर्यनाथ ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देते हुए बताया कि क्लिनिक का 2024-25 का पंजीयन है जिसके रिनिवल के लिए 02 जुलाई 2025 को ऑनलाइन आवेदन कर 05 जुलाई को सीएमओ डॉ संजय शैवाल से वैध प्रपत्रों के साथ भेंट किया गया, तो उन्होंने एक सप्ताह में रिपोर्ट लगाने के लिए कहा लेकिन जब एक सप्ताह में रिपोर्ट नहीं लगी तो पुनः मुलाकात की गई जिसके बाद सीएमओ संजय शैवाल ने अपने कार्यालय में तैनात महेश बाबू से मिलने के लिए कहा। महेश बाबू ने स्पष्ट रूप से 05 वर्ष के पंजीयन के लिए डेढ़ लाख रुपये सीएमओ के लिए और 10 हज़ार रुपये अपने लिए अवैध रकम की डिमांड किया।
जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने अपर जिलाधिकारी डॉ सदानंद गुप्ता की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मजिस्ट्रेटी जांच का आदेश दिया जिस टीम में एसडीएम सदर प्रतीक्षा सिंह व एसडीएम न्यायिक जलालपुर डॉक्टर शशि शेखर शामिल है।
पूरे जनपद में चर्चा है कि मुख्यचिकित्साधिकारी डॉक्टर संजय शैवाल द्वारा पैथोलॉजी सेंटरों सहित निजी क्लिनिक व अस्पतालों से जांच एवं रिनिवल आदि के नाम पर लगातार मोटी अवैध वसूली की जा रही है, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग दबी जुबान में सब कुछ बताते हैं लेकिन कैमरे के सामने आने से डरते हैं क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के मुखिया को काफी शक्ति प्रदान है।
बहरहाल स्वास्थ विभाग के मुखिया व उनके चहेते बाबू के खिलाफ डीएम ने जांच का आदेश दे दिया है जबकि विभागीय लोगो का कहना है कि मुखिया जी अपने ऊंचे रसूख के बल पर खुद को साफ निकाल कर छोटी मछली को चारा बनाने में काफी माहिर हैं हालांकि जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि डॉ संजय शैवाल पर लगे गंभीर आरोप कितना सही है।




