अम्बेडकरनगर: राजस्व विभाग की लापरवाही का एक अनोखा मामला सामने आया है जहाँ मत्स्य पालन के लिए तालाब का पट्टा आवंटन कर दिए जाने के दो साल बाद भी संबंधित पट्टाधारकों को अब तक तालाब पर कब्जा नहीं मिल सका है। इस कारण न सिर्फ पट्टाधारक को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, बल्कि तालाब पर अवैध मछली पकड़ने को लेकर गांव में आए दिन विवाद की स्थिति बनी रहती है।
जलालपुर तहसील के जीवत खुर्रम गांव निवासी सुखई पुत्र जवाहर ने जलालपुर थाना समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि वर्ष 2022 में राजस्व विभाग द्वारा समिति के नाम मत्स्य पालन के लिए तालाब का पट्टा आवंटित किया गया था, जिसकी वैधता 14 जुलाई 2033 तक है। लेकिन दो साल बीत जाने के बावजूद अब तक उन्हें कब्जा नहीं मिला है। सुखई ने बताया कि वे तालाब की खुदाई करवाकर मत्स्य पालन का कार्य प्रारंभ कराना चाहते थे, लेकिन गांव के कुछ विपक्षी, जिनमें गिरधारी और बंसीलाल सहित अन्य लोग शामिल हैं, आए दिन काम में बाधा डालते हैं। उन्होंने डायल 112 बुलाकर कार्य रुकवा दिया, जिससे मत्स्य पालन की प्रक्रिया बाधित हो गई है। पीड़ित का कहना है कि इस विवाद के कारण उनकी आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। सुखई का आरोप है कि बार-बार अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद अब तक तालाब की पैमाइश कर उन्हें कब्जा नहीं दिलाया गया। जब भी वे कब्जा लेने का प्रयास करते हैं, विपक्षीगण हंगामा कर देते हैं और मामला तनावपूर्ण हो जाता है।
पट्टाधारक ने प्रशासन से मांग की है कि तालाब की शीघ्र पैमाइश कराते हुए उन्हें कब्जा दिलाया जाए ताकि वे अपने वैध अधिकार के तहत मत्स्य पालन शुरू कर सकें। ग्रामीणों में इस मामले को लेकर रोष व्याप्त है, वहीं राजस्व विभाग की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।




