अम्बेडकरनगर: बिहार से गमछा बेचकर लौट रहे कपड़ा व्यापारी रईस अहमद और जलाल के साथ 11 अप्रैल को बिडहर पुल के पास दिनदहाड़े हुई 17 लाख रुपये की लूट की गुत्थी अब तक नहीं सुलझ सकी है। असलहे के बल पर हुई इस वारदात में बदमाश फायरिंग करते हुए स्विफ्ट कार से फरार हो गए थे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि घटना के एक सप्ताह बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि घटना स्थल के पास बनी पुलिस चौकी पर ताला लटका मिला, जबकि कुछ दिन पहले ही वहां से सीसीटीवी कैमरा भी हटा दिया गया था। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होना लाजिमी है।
घटना के दूसरे दिन नवागत पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह ने सिविल ड्रेस में मौके पर पहुंचकर जल्द खुलासे का भरोसा दिलाया था। कई टीमों का गठन कर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए, लेकिन एक हफ्ते से अधिक समय बीतने के बाद भी कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
सूत्रों के मुताबिक, जहांगीरगंज पुलिस ने कई संदिग्धों को उठाकर पूछताछ की, लेकिन जांच अब तक सिफर साबित हुई है। इधर, जब थाना प्रभारी से संपर्क किया गया तो उनके सीयूजी नंबर पर एसएसआई ने बताया कि वे दबिश में व्यस्त हैं, वहीं सीओ आलापुर का नंबर बंद मिला—जिससे आधिकारिक जानकारी का अभाव और भी सवाल खड़े करता है।
अब बड़ा सवाल यही है—
👉 जब चौकी पर ताला और कैमरे गायब हों, तो आम जनता की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा?
👉 आखिर क्यों बड़े लूटकांड पर पुलिस की चुप्पी, जबकि छोटे मामलों में तुरंत बयान जारी हो जाते हैं?
👉 और सबसे अहम—इस लापरवाही की जवाबदेही कब तय होगी?
दिनदहाड़े हुई इस वारदात का खुलासा न होने से व्यापारियों में भय और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है, जो आने वाले समय में बड़े आंदोलन का रूप भी ले सकता है।








