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डीएम दरबार पहुंचा कथित किछौछा ‘पार्किंग टोकन विवाद’, श्रद्धालुओं से होती है तीखी बहस-आक्रोश

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उर्स मेला के दौरान सवा महीना तक दो गुना वसूली का नगर पंचायत ने बनाया है नियम

श्रद्धालु बोले- सेवा के नाम पर वसूली या मनमाने नियमों के तहत जबरन वसूला जाता है शुल्क!

हाल ही में डीएम एसपी ने दलबल के साथ दरगाह परिक्षेत्र का किया था दौरा लेकिन टैक्सी स्टैण्ड व्यवस्था पर नहीं दिया कोई ध्यान

अम्बेडकरनगर: आध्यात्मिक इलाज़ के लिए विश्व स्तर पर बहुप्रसिद्ध हज़रत सैय्यद मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी की दरगाह किछौछा में आने वाले श्रद्धालुओं से वाहन पार्किंग टोकन वसूली को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर निजी वाहनों से टोकन वसूली को लेकर जिलाधिकारी से शिकायत कर इसे कथित अवैध बताया गया है, वहीं दूसरी ओर ठेकेदार का कहना है कि यह वसूली विधिवत नीलाम किए गए वाहन स्टैंड ठेके के तहत की जा रही है। ऐसे में मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में पहुंच गया है।
कटरा जनपद बस्ती निवासी निसार अहमद ने जिलाधिकारी को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि दरगाह किछौछा पर आने वाले जायरीनों के निजी वाहनों से बिना किसी स्पष्ट वैधानिक आधार के टोकन के नाम पर जबरन मोटी धनराशि वसूली जा रही है। उनका कहना है कि बाहर से आने वाले श्रद्धालु विवाद से बचने के लिए मजबूरी में भुगतान कर देते हैं। उन्होंने मांग की है कि यदि यह वसूली नियमों के विरुद्ध है तो तत्काल बंद कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।


हालांकि, इस मामले का दूसरा पक्ष भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा द्वारा हर वर्ष वाहन स्टैंड की नीलामी कराई जाती है। इस वर्ष करीब 1.51 करोड़ रुपये में ठेका दिए जाने की जानकारी सामने आई है। ठेका शर्तों के अनुसार दर्शनार्थियों के वाहनों से भी निर्धारित टोकन शुल्क वसूलने का प्रावधान बताया जाता है। उर्स के दौरान यह शुल्क बढ़ा कर दो गुना करने की व्यवस्था भी ठेका शर्तों में शामिल होने की बात कही जा रही है।
बताते चलेंकि नगर पंचायत द्वारा टैक्सी स्टैंड ठेका नीलामी के बाद ठेकेदारों को खुली छूट मिप जाती है कि वो जहां चाहें वहां पर अपने गुर्गों के सहारे जबरन वसूली करें हालांकि नियमानुसार जहां टैक्सी स्टैंड हैं टोकन वसूली वहीं पर होनी चाहिए और वहां वाहनों को समुचित खड़ा करने की व्यवस्था के साथ पीने का साफ पानी व शैचालय का भी इंर्ज़ाम होना चाहिए लेकिन नगर पंचायत ठेकेदारों द्वारा मुख्य सड़क पर ही पूरी दबंगई के साथ सभी तरह के वाहनों से जबरन वसूली की जाती है।
यही वजह है कि अब पूरा विवाद इस सवाल पर टिक गया है कि क्या निजी वाहनों से टोकन वसूली का प्रावधान वास्तव में सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत और वैधानिक है, या फिर श्रद्धालुओं से नियमों की आड़ में अतिरिक्त वसूली की जा रही है।
अब जिलाधिकारी स्तर पर होने वाली जांच ही यह साफ करेगी कि शिकायत सही है या नगर पंचायत की व्यवस्था नियमों के अनुरूप संचालित हो रही है। फिलहाल किछौछा का ‘पार्किंग टोकन विवाद’ प्रशासन और आमजन के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। (मान्यता प्राप्त पत्रकार फखरे आलम खान की विशेष रिपोर्ट)

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