अम्बेडकरनगर: टाण्डा अधिवक्ता संघ के आह्वान पर शनिवार को 22वें दिन भी कार्य बहिष्कार जारी रहा। अधिवक्ताओं द्वारा टाण्डा एसडीएम, तहसीलदार व नायाब तहसीलदार कोर्ट का पूरी तरह बहिष्कार ही नहीं कर रखा है बल्कि अधिकारियों के चैम्बर में भी मिलने पर संघ की सदस्यता समाप्त करने अथवा भारी जुर्माना देने का फैसला किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार टाण्डा तहसीलदार व अधिवक्ताओं के बीच काफी दिनों से खींचातानी जारी है। अधिवक्ताओं का कहना है कि तहसीलदार द्वारा विपक्ष के अधिवक्ताओं की बिना सुनवाई के ही आदेश पर आदेश जारी कर दे रहे हैं तथा सभी कार्यों पर मोटी रकम वसूली जाती है। पूर्व में काफी दिनों तक तहसीलदार के खिलाफ धरना प्रदर्शन व कार्य बहिष्कार हुआ था लेकिन उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मामला का शांत करा दिया गया था परंतु तहसीलदार व अधिवक्ताओं के बीच का विवाद पूर्णतः समाप्त नहीं हो सका।
गत 14 नवम्बर को टाण्डा अधिवक्ता सभा की आम सभा में तहसील की सभी कोर्ट के कार्यों का बहिष्कार करने का प्रस्ताव पास किया गया था। उक्त सम्बन्ध में अधिवक्ता संघ टाण्डा के महामंत्री राजेश सिंह ने सभी अधिवक्ताओं को अवगत कराया कि 15 नवम्बर से एसडीएम, तहसीलदार व नायब तहसीलदार की अदालतों के सभी अधिवक्ता पूर्णतः बहिष्कार करेंगे और कोई भी अधिवक्ता उन अधिकारियों के चेम्बर अथवा कोर्ट में भेंट नहीं करेगा अन्यथा उसकी सदस्यता संघ से समाप्त कर दी जाएगा, नहीं तो पांच हजार रुपये का भारी भरकम जुर्माना देना पड़ेगा।
टाण्डा अधिवक्ता संघ ने कार्य बहिष्कार के दौरान अधिकारियों से भेंट करने पर नज़र रखने के लिए निगरानी समिति भी बनाई है जिसमें अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष शेर बहादुर सिंह, महामंत्री राजेश कुमार सिंह, मंत्री मो.मोकीम, राम नरेश कन्नौजिया, अजय प्रताप श्रीवास्तव शामिल हैं।




