चर्चा: समाजवादी पार्टी टाण्डा कमेटी में हो गया पूरा खेल, मगर असली मुद्दा ‘गायब’!
अम्बेडकरनगर: समाजवादी पार्टी टांडा नगर की राजनीति में सैय्यद कसीम अशरफ को लेकर घटनाक्रम लगातार नया मोड़ ले रहा है। पहले एक मुकदमे में पार्टी का साथ न मिलने की नाराज़गी से त्यागपत्र, फिर जिलाध्यक्ष द्वारा मंजूरी, उसके बाद विधायक के हस्तक्षेप के बीच पुनः टाण्डा नगर अध्यक्ष पद पर वापसी और अब कसीम अशरफ ने नगर कमेटी को रिसेट करने का प्लान बनाते हुए पूरी टीम को ही भंग कर दिया। पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस मुद्दे पर इस्तीफा दिया गया था, वही अब पूरी तरह गायब नजर आ रहा है।
बताते चलेंकि टाण्डा नागार्ड अध्यक्ष सैय्यद कसीम अशरफ ने अपने त्यागपत्र में साफ तौर पर लिखा था कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे में संगठन से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, जिससे नाराज़ होकर उन्होंने पद छोड़ा। हालांकि जिलाध्यक्ष द्वारा जारी पत्र में इस्तीफा स्वीकार करते समय स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया गया और बाद में फोन वार्ता में भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी देने की बात कही गई।इसके मात्र 24 घंटा के अंदर टांडा विधायक राममूर्ति वर्मा के हस्तक्षेप का पत्र वायरल होने के साथ जिलाध्यक्ष द्वारा पुनः इस्तीफा अस्वीकार का पत्र जारी हुआ और कसीम अशरफ को फिर नगर अध्यक्ष बना दिया गया। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में मुकदमे को लेकर जताई गई नाराज़गी का कहीं उल्लेख नहीं किया गया, जिससे राजनीतिक हलकों में कई सवाल उठने लगे।
अब कसीम अशरफ ने नया पत्र जारी कर 2027 चुनाव को ध्यान में रखते हुए नगर संगठन को मजबूत बनाने के नाम पर नगर कमेटी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है और एक सप्ताह में नई कमेटी गठित करने की बात कही है। पत्र में टाण्डा विधायक राममूर्ति वर्मा से वार्ता के बाद यह फैसला लेने का जिक्र भी किया गया है।
इस्तीफा से लेकर बहाली और फिर कमेटी भंग तक के घटनाक्रम ने सपा संगठन में हलचल तेज कर दी है। चर्चा यह भी है कि मुकदमे में साथ न मिलने का मुद्दा उठाकर इस्तीफा दिया गया, लेकिन बाद की पूरी कार्रवाई में वही मुद्दा पूरी तरह दब गया और संगठनात्मक फेरबदल की नई पटकथा सामने आ गई।
फिलहाल टांडा की सियासत में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या नाराज़गी दूर हुई या मुद्दा दबा दिया गया? वहीं कमेटी भंग होने के बाद अब नई टीम के गठन पर सबकी निगाहें टिक गई हैं।









