अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान एडिटर-मान्यता प्राप्त) बसखारी थाना क्षेत्र के अकबरपुर रोड स्थित जय इन्द्रा हॉस्पिटल पर आखिरकार जिला प्रशासन का शिकंजा कस गया। महिला की संदिग्ध मौत के 18 दिन बाद शनिवार को जिलाधिकारी ईशा प्रिया के निर्देश पर अस्पताल को सील कर दिया गया। लेकिन कार्रवाई के दौरान जो खुलासे हुए, उन्होंने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। जांच के समय न तो अस्पताल का उपस्थिति एवं भर्ती रजिस्टर मिला और न ही अस्पताल में संचालित अल्ट्रासाउंड मशीन। वहीं अस्पताल संचालक भी जांच के बीच बहाना बनाकर मौके से निकल गया।
मामला सुमन पत्नी पंकज की इलाज के दौरान हुई संदिग्ध मौत से जुड़ा है। मृतका के भाई संजय यादव ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर अस्पताल में लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद डीएम ने एडीएम टांडा, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रामानंद सिद्धार्थ और महिला चिकित्सक डॉ. रजनी सविता को जांच की जिम्मेदारी सौंपी।
शनिवार दोपहर करीब दो बजे जांच टीम अस्पताल पहुंची। अस्पताल संचालक मूलचंद मौर्य और मृतका के भाई संजय यादव की मौजूदगी में जांच शुरू हुई। अधिकारियों ने अस्पताल का उपस्थिति रजिस्टर और भर्ती रजिस्टर मांगा, लेकिन दोनों उपलब्ध नहीं कराए जा सके। एसीएमओ डॉ. रामानंद सिद्धार्थ करीब दो घंटे तक रजिस्टर मंगवाते रहे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका।
जांच टीम ने दोनों पक्षों के लिखित बयान भी दर्ज किए। इसी दौरान यह भी सामने आया कि कार्रवाई होने से पहले ही अस्पताल से अल्ट्रासाउंड मशीन हटा दी गई थी। इससे जांच की निष्पक्षता और अस्पताल प्रबंधन की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, सीलिंग की कार्रवाई शुरू होने से पहले नायब तहसीलदार कौशल कांत मिश्र कुछ देर के लिए मौके से चले गए। इसी बीच अस्पताल संचालक ने “उपस्थिति रजिस्टर ढूंढ़ने” का बहाना बनाया और मौके से निकल गया। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्रवाई पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
शाम करीब चार बजे एडीएम टांडा, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रामानंद सिद्धार्थ, महिला चिकित्सक डॉ. रजनी सविता, स्वास्थ्य विभाग की टीम, उपनिरीक्षक रिंकू सरोज और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में जय इन्द्रा हॉस्पिटल को सील कर दिया गया।
अब पूरे जिले में एक ही सवाल गूंज रहा है कि अगर अस्पताल में इतनी गंभीर अनियमितताएं थीं तो कार्रवाई करने में 18 दिन क्यों लगे? क्या इस देरी का फायदा उठाकर अस्पताल से महत्वपूर्ण दस्तावेज और अल्ट्रासाउंड मशीन हटाई गई? क्या सिर्फ अस्पताल सील करने से मामला खत्म हो जाएगा या मरीज की मौत और साक्ष्य गायब करने के आरोपों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज होगी?
फिलहाल जांच जारी है, लेकिन जय इन्द्रा हॉस्पिटल पर लगी सील ने जिले में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर बड़े सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।




