राजेसुल्तानपुर में अवैध क्लीनिक पर गलत इंजेक्शन से ट्रक चालक की जान गई, विभागीय कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
अम्बेडकरनगर जिले में स्वास्थ्य विभाग की ढिलाई और कमजोर निगरानी ने झोलाछाप डॉक्टरों को खुली छूट दे रखी है। इसका खामियाजा आम जनता को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है। ताजा मामला राजेसुल्तानपुर बाजार का है, जहां बिना पंजीयन चल रहे चंद्रापाली क्लीनिक में गलत इंजेक्शन लगाए जाने से ट्रक चालक राम राकेश यादव (55 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें इलाज के लिए उक्त क्लीनिक लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि बिना किसी जांच और योग्य चिकित्सकीय सलाह के इंजेक्शन लगाया गया, जिसके कुछ ही मिनटों में हालत बिगड़ गई और राम राकेश ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद बाजार में अफरा-तफरी मच गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने आनन-फानन में क्लीनिक को सील कर दिया, लेकिन सवाल यह है कि अगर विभाग समय रहते जांच और निगरानी करता, तो क्या यह मौत टाली नहीं जा सकती थी? घटना के बाद से ही क्लीनिक संचालक फरार बताया जा रहा है, जबकि समाचार लिखे जाने तक मुकदमा तक दर्ज नहीं हो सका है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजेसुल्तानपुर सहित जिले के कई कस्बों और बाजारों में वर्षों से दर्जनों झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम क्लीनिक चला रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग को इसकी पूरी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई केवल हादसे के बाद ही दिखाई देती है। ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मृतक के परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की है। लोगों का कहना है कि सिर्फ क्लीनिक सील कर देना पर्याप्त नहीं है, जब तक जिम्मेदारों पर आपराधिक कार्रवाई नहीं होती।
यह घटना न सिर्फ एक व्यक्ति की मौत की कहानी है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आईना भी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में सिर्फ औपचारिक कार्रवाई करता है या फिर झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्त कदम उठाकर भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाता है।








