“अभिभावकों ने जिलाधिकारी से मांग किया है कि भीषण गर्मी को देखते हुए बच्चों के हित में ठोस कदम उठाया जाए”
अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान एडिटर-मान्यता प्राप्त) एक ओर आसमान से बरसती आग और दूसरी ओर तपती सड़कों पर स्कूल जाने को मजबूर मासूम बच्चे। भीषण गर्मी के बीच प्राइवेट स्कूलों सहित परिषदीय एवं कस्तूरबा गांधी विद्यालयों के पुनः खुलने से स्कूलों में रौनक तो लौटी, लेकिन अभिभावकों की चिंता और नाराजगी भी खुलकर सामने आने लगी है। 
ग्रीष्मावकाश एवं अतिरिक्त अवकाश समाप्त होने के बाद गुरुवार को जिले के सभी परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन शुरू हुआ। इस अवसर पर जिलाधिकारी ईशा प्रिया और पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह ने प्राथमिक विद्यालय बर्धा भिउरा पहुंचकर बच्चों का रोली-टीका लगाकर स्वागत किया तथा उनके साथ मध्याह्न भोजन भी ग्रहण किया। अधिकारियों ने विद्यालय की साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था, शौचालय, रसोईघर और एमडीएम की गुणवत्ता का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
जिलाधिकारी ने बच्चों से संवाद कर उन्हें नियमित रूप से विद्यालय आने और मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया, वहीं शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिले के अन्य विद्यालयों में भी विभिन्न अधिकारियों ने पहुंचकर बच्चों का स्वागत किया और व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
हालांकि प्रशासनिक उत्साह के बीच भीषण गर्मी का मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। अभिभावकों का कहना है कि तापमान लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है और ऐसे मौसम में छोटे बच्चों को स्कूल भेजना उनकी सेहत के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। कई अभिभावकों ने सवाल उठाया कि जब गर्मी के कारण पहले अवकाश बढ़ाया गया था तो मौसम में कोई विशेष राहत न होने के बावजूद विद्यालय खोलने का निर्णय क्यों लिया गया।
स्कूलों में बच्चों की वापसी से शिक्षा व्यवस्था में नई ऊर्जा जरूर दिखाई दी, लेकिन तपती धूप में नौनिहालों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर उठ रहे सवाल प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं। अभिभावकों ने जिलाधिकारी से मांग किया है कि भीषण गर्मी को देखते हुए बच्चों के हित में ठोस कदम उठाएं जिससे कोई अनहोनी ना होने पाए।




