अंबेडकरनगर की राजनीति में बीते एक सप्ताह से चल रही तमाम अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया। करीब तीन दशक तक बहुजन समाज पार्टी के बैनर तले सक्रिय राजनीति करने वाले जलालपुर नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष और अंबेडकरनगर लोकसभा सीट से प्रत्याशी रहे कमर हयात ने अपनी नई सियासी पारी की औपचारिक शुरुआत कर दी है। लखनऊ में अखिलेश यादव की मौजूदगी में उन्होंने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर यह साफ संकेत दे दिया कि अब उनकी राजनीतिक रणनीति नई दिशा में आगे बढ़ेगी।
बीते शुक्रवार को दिए गए इस्तीफे के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि कमर हयात आखिर किस दल का रुख करेंगे। भाजपा, कांग्रेस और सपा—तीनों के नाम कयासों में शामिल थे, लेकिन अंततः उन्होंने सपा को चुनकर तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया।राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो कमर हयात का यह कदम सिर्फ दल परिवर्तन नहीं, बल्कि अंबेडकरनगर की सियासत में सामाजिक और चुनावी समीकरणों के बदलने का संकेत भी है। जलालपुर और आसपास के क्षेत्रों में उनकी व्यक्तिगत पकड़ और संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए सपा को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।
कमर हयात के सपा में शामिल होते ही जलालपुर क्षेत्र के स्थानीय सपा नेताओं के बीच भी हलचल तेज हो गई है। नगर पालिका से लेकर विधानसभा और लोकसभा स्तर तक टिकट दावेदारी की चर्चाएं फिर गर्म हो गई हैं। पार्टी के पुराने और नए चेहरों के बीच संतुलन कैसे साधा जाएगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। जहां कमर हयात के समर्थकों में नई ऊर्जा और उत्साह देखा जा रहा है, वहीं विरोधी दलों के खेमे में भी रणनीतिक बैठकों का दौर शुरू होने की चर्चा है। माना जा रहा है कि आगामी निकाय या लोकसभा चुनाव में यह राजनीतिक बदलाव निर्णायक भूमिका निभा सकता है। इस मौके पर मुख्य रूप से नसीमुद्दीन सिद्दीकी, अबु आसिम आज़मी, मोहीबुल्लाह नदवी सहित कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कुल मिलाकर, अंबेडकरनगर की सियासत में यह दलबदल केवल एक व्यक्ति का फैसला नहीं, बल्कि आने वाले चुनावी समीकरणों की बिसात पर चली एक बड़ी चाल के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि कमर हयात को संगठन में क्या अहम जिम्मेदारी मिलती है और उनका अगला सियासी कदम क्या होता है।





