बहुजन समाज पार्टी को जनपद अंबेडकरनगर में बड़ा और अप्रत्याशित राजनीतिक झटका लगा है। कांशीराम के करीबी सहयोगी रहे और बसपा के पूर्व लोकसभा उम्मीदवार (55–अम्बेडकरनगर) तथा नगर पालिका परिषद जलालपुर के पूर्व चेयरमैन क़मर हयात अंसारी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। तीन दशक तक बसपा की राजनीति का चेहरा रहे क़मर हयात का जाना पार्टी के लिए गंभीर सियासी नुकसान के तौर पर देखा जा रहा है।
करीब 30 वर्षों तक बसपा के झंडे तले राजनीति करने वाले कद्दावर नेता क़मर हयात अंसारी ने अपने त्यागपत्र में स्पष्ट किया है कि उन्होंने मान्यवर कांशीराम के मिशन और पार्टी सुप्रीमो बहन कुमारी मायावती के निर्देशन में दलित, मुस्लिम और पिछड़े वर्गों के हक़ के लिए संघर्ष किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हालिया लोकसभा चुनाव में उन्हें करीब दो लाख वोट मिले, जो उनके जनाधार और सर्वसमाज के समर्थन को दर्शाता है।
हालांकि, अपने पत्र में उन्होंने बहन मायावती के प्रति सम्मान जताते हुए “अपरिहार्य कारणों” का हवाला देकर पार्टी छोड़ने की बात कही, लेकिन इन कारणों को लेकर अब तक कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है। यही वजह है कि उनके इस्तीफे ने बसपा संगठन की अंदरूनी स्थिति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस घटनाक्रम से जहां बसपा खेमे में खलबली मची है, वहीं राजनीतिक गलियारों में नई सियासी पटकथा लिखे जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि क़मर हयात अंसारी जल्द ही किसी बड़े राजनीतिक दल में शामिल हो सकते हैं। भाजपा में जाने की अटकलें सबसे ज्यादा जोर पकड़ रही हैं, हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
उधर, जब इस पूरे मामले पर बसपा जिला अध्यक्ष सुनील सावंत से बातचीत की गई तो उन्होंने साफ कहा कि “इस संबंध में न तो कोई पत्राचार हुआ है और न ही त्यागपत्र की कोई जानकारी मिली है।” जिला नेतृत्व के इस बयान ने मामले को और भी रहस्यमय बना दिया है।
कुल मिलाकर, क़मर हयात अंसारी का इस्तीफा केवल एक व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि अंबेडकरनगर की सियासत में बड़ा संकेत माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बसपा इस झटके से कैसे उबरती है और क़मर हयात अंसारी अगला कदम किस दिशा में बढ़ाते हैं।








