टाण्डा कोतवाली पुलिस को मिली बड़ी सफलता
अम्बेडकरनगर: पंजाब नेशनल बैंक शाखा छज्जापुर से जुड़े करोड़ों रुपये के बीमा घोटाले में टाण्डा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य अभियुक्त उमेर अहमद को गिरफ्तार कर लिया। कूटरचित बीमा बांड, ब्लैंक चेक और बैंकिंग साठगांठ के सहारे वर्षों से चल रहे इस फ्राड ने दर्जनों मुआवजा धारकों को कंगाल कर दिया। पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर शंकर ने प्रेस वार्ता कर मामले का सनसनीखेज खुलासा किया।
यह कार्रवाई एडीजी लखनऊ जोन व आईजी अयोध्या परिक्षेत्र के निर्देश पर चलाए जा रहे अपराधियों के विरुद्ध अभियान के तहत की गई। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में एएसपी के पर्यवेक्षण और क्षेत्राधिकारी टाण्डा के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने मुकदमा संख्या 31/26 बीएनएस की गंभीर धाराओं में वांछित अभियुक्त को फुलवरिया तिराहे से गिरफ्तार किया।
पुलिस जांच में सामने आया कि उमेर अहमद वर्ष 2019 से फरवरी 2025 तक योजनाबद्ध तरीके से ठगी करता रहा। उसने एनटीपीसी व एनएचएआई द्वारा अधिग्रहित भूमि के मुआवजे की रकम पाने वाले लोगों को बीमा पॉलिसी के नाम पर निवेश का झांसा दिया। पांच साल में पैसा डबल करने का लालच देकर पीड़ितों से ब्लैंक चेक लिए गए और कम रकम की पॉलिसी कराकर शेष पैसा अपने व रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर करा लिया गया। इस खबर की वीडियो यूट्यूब पर देखने के लिए 💐 इसे टच करें
जब पीड़ितों ने बांड की रकम कम होने पर आपत्ति जताई तो अभियुक्त ने अपने साथी शरद मौर्य व अज्ञात बैंक कर्मियों के साथ मिलकर एडिटेड व कूटरचित बीमा बांड तैयार कर उन्हें सौंप दिए। इन्हें असली बताकर पीड़ितों का भरोसा बनाए रखा गया। इसी तरीके से करीब 15-16 लोगों से लगभग दो करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अभियुक्त की अर्टिका कार, बुलेट मोटरसाइकिल, स्कूटी, सैमसंग गैलेक्सी एस-23 और आईफोन 15 प्रो को अपराध से अर्जित संपत्ति मानते हुए सीज किया है। साथ ही पीड़ितों की रकम जिन खातों में भेजी गई थी, ऐसे 13 बैंक खातों को भी सीज कराया गया है।
पुलिस अधीक्षक ने साफ किया कि इस संगठित आर्थिक अपराध में शामिल अन्य अभियुक्तों और संदिग्ध बैंक कर्मियों की पहचान कर शीघ्र गिरफ्तारी की जाएगी। उनकी संपत्तियों को भी मुकदमे में अटैच किया जाएगा। मुख्य अभियुक्त को न्यायालय भेज दिया गया है और विवेचना जारी है।
इस कार्रवाई से साफ है कि मुआवजा राशि पर नजर गड़ाए बैठे सफेदपोश ठगों का नेटवर्क सक्रिय था, जिसे पुलिस ने बेनकाब कर दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बैंक के भीतर बैठे गुनहगार कब सलाखों के पीछे पहुंचते हैं।








