अम्बेडकरनगर: जलालपुर विकासखंड में सरकारी विकास कार्यों की हकीकत सामने आते ही हड़कंप मच गया है। खंड विकास अधिकारी की कथित उदासीनता के चलते क्षेत्र पंचायत अंतर्गत कराए जा रहे नाली, सड़क और इंटरलॉकिंग कार्यों में भारी अनियमितताएं उजागर हो रही हैं। आरोप है कि ठेकेदारों द्वारा मानकों को ताक पर रखकर घटिया गुणवत्ता का कार्य कराया जा रहा है, जिससे सरकारी धन की खुली लूट की जा रही है।
ताजा मामला जलालपुर ब्लॉक के अशरफपुर मजगांवा स्थित राजाराम डिग्री कॉलेज के पास चल रहे सड़क इंटरलॉकिंग कार्य का है, जहां भ्रष्टाचार की सारी सीमाएं पार होती नजर आईं। मौके पर देखा गया कि इंटरलॉकिंग का कार्य बिना किसी आधार के सीधे मिट्टी पर सफेद बालू डालकर पूरा कर दिया गया। जबकि सरकारी मानकों के अनुसार सड़क निर्माण से पहले समतलीकरण, पत्थर के बोल्डर बिछाना और फिर बालू डालकर इंटरलॉकिंग किया जाना अनिवार्य होता है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित ठेकेदार ने नियम-कानून को दरकिनार कर खाली जमीन पर ही इंटरलॉकिंग बिछा दी। इतना ही नहीं, सड़क के दोनों ओर लगाए गए बॉर्डर में भी घटिया किस्म की पीली ईंटों का प्रयोग किया गया है, जो गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उक्त मार्ग का निर्माण जनहित के बजाय एक निजी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने की मंशा से उसकी निजी भूमि में कराया गया है। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो यह सड़क कुछ ही समय में क्षतिग्रस्त हो जाएगी और सरकारी धन पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।
मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से पूरे प्रकरण की जांच कर दोषी ठेकेदारों व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा मानक के अनुरूप पुनः निर्माण कराने की मांग की है।
इस संबंध में जलालपुर खंड विकास अधिकारी दिनेश राम ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जेई को जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच में अनियमितता पाए जाने पर पूरी इंटरलॉकिंग उखड़वाकर मानक के अनुसार दोबारा कार्य कराया जाएगा। साथ ही क्षेत्र पंचायत अंतर्गत चल रहे सभी निर्माण कार्यों की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि जांच के बाद सिर्फ कार्रवाई के आश्वासन मिलेंगे या वास्तव में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।





