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बसखारी प्रसूता मौत कांड में सीएमओ की भूमिका पर सवाल: फर्जी डॉक्टरों का नेटवर्क, दो गिरफ़्तार व कई रडार पर

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अम्बेडकरनगर: बसखारी में अवैध सिजेरियन से प्रसूता की मौत के बाद मामला अब सीधे स्वास्थ्य विभाग और सीएमओ कार्यालय तक जा पहुंचा है। नवजीवन हॉस्पिटल में बिना वैध पंजीकरण ऑपरेशन किए जाने का खुलासा होने के बावजूद यह सवाल तेज़ी से उठ रहा है कि आखिर ऐसे अस्पताल और फर्जी डॉक्टर इतने लंबे समय तक कैसे फलते-फूलते रहे। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि यह सब स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत और सीएमओ की संरक्षणकारी भूमिका के बिना संभव नहीं है।
बताया जा रहा है कि जिस नवजीवन हॉस्पिटल में यह जानलेवा ऑपरेशन किया गया, उसके संचालन, लाइसेंस और चिकित्सकीय मानकों को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन सीएमओ कार्यालय की ओर से न तो ठोस जांच हुई और न ही कोई सख्त कार्रवाई। सवाल यह भी है कि बिना एमबीबीएस और स्त्री रोग विशेषज्ञ के अस्पताल में सी-सेक्शन जैसे गंभीर ऑपरेशन कैसे हो रहे थे और इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को क्यों नहीं हुई, या फिर जानबूझकर अनदेखी की गई।


पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपित योगेश यादव और शुभम विश्वकर्मा किसी भी मान्यता प्राप्त मेडिकल रजिस्टर में दर्ज नहीं हैं। इसके बावजूद अस्पताल बेरोकटोक संचालित होता रहा। सूत्रों का दावा है कि जिले में दर्जनों ऐसे प्राइवेट अस्पताल और क्लीनिक हैं, जो बिना मानक, बिना विशेषज्ञ और बिना संसाधन केवल स्वास्थ्य विभाग की ढीली निगरानी के चलते चल रहे हैं। ऐसे में सीएमओ की कार्यशैली और निरीक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रसूता प्रियंका की मौत के बाद जब मामला तूल पकड़ने लगा, तब जाकर अस्पताल सील किया गया, लेकिन जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते सीएमओ स्तर पर कार्रवाई होती, तो एक महिला की जान बचाई जा सकती थी। अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों या फर्जी डॉक्टरों पर ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों, विशेषकर सीएमओ की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो।
जनता और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि यह मामला केवल एक अस्पताल या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जिले में चल रहे अवैध चिकित्सा तंत्र का हिस्सा है, जिसे विभागीय संरक्षण प्राप्त है। यदि सीएमओ और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे कांड दोहराए जाते रहेंगे। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े रिकॉर्ड, निरीक्षण रिपोर्ट और शिकायत फाइलों को भी खंगाला जाएगा।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या शासन-प्रशासन इस मामले में केवल दिखावटी कार्रवाई करेगा या फिर सीएमओ समेत जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कदम उठाकर एक नजीर पेश करेगा।

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