अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान – एडिटर इन चीफ) आध्यात्मिक इलाज़ के लिए विश्व ख्यातिप्राप्त दरगाह किछौछा में बाहरी व साईं बिरादरी के लोगों के हस्तक्षेप से ख़ादिम कमेटी में आक्रोश चल रहा है तथा मुख्यमंत्री से मुलाकात करने व आंदोलन की रणनीति बनाने जुट गए हैं जबकि दूसरी तरफ दरगाह मोतवल्ली व सज्जादानशीन ने मलंग के सहयोग की सराहना किया है और कहा कि बिना मलंग के सहयोग के उर्स व मेला सकुशल सम्पन्न ही नहीं हो सकता है।
प्रत्येक वर्ष मोहर्रम माह के अंतिम सप्ताह में सुल्तान ए सिमना हज़रत सैय्यद शाह सूफी मखदूम अशरफ जहांगीर का वार्षिक उर्स दरगाह किछौछा में बड़ी अकीदत के साथ मनाया जाता है जिसमें देश के कोने कोने के अलावा विदेशों से भी जायरीनों की आमद होती है। वार्षिक उर्स व मेला की तैयारी के बीच तंज़ीम खुद्दाम आस्ताना दरगाह मखदूम अशरफ (ख़ादिम अर्थात सेवाकर समिति दरगाह किछौछा) के सचिव इसरार अहमद ने पत्र जारी कर दरगाह में आए जायरीनों व श्रद्धालुओं की सेवा में बाहरी व साईं बिरादरी के लोगों के हस्तक्षेप ना करने का मामला उठाया है।
तंज़ीम खुद्दाम का कहना है कि दरगाह के तीन पक्षकार है जिसमें ख़ादिम, मुजाविर व पीरजादगान हैं जिनके मध्य उच्च न्यायालय में वाद लम्बित है लेकिन 1998 में एक अंतरिम आदेश पर सभी कार्य शांतिपूर्ण ढंग से संचालित हो रहे हैं परंतु कुछ वर्षों से बाहरी लोग व साईं बिरादरी के लोग हस्तक्षेप कर श्रद्धालुओं व जायरीनों को परेशान कर छीनाझपटी भी करने लगे हैं जिससे ख़ादिम समूह की क्षवि धूमिल होने के साथ बदनाम हो रहा है एवं खादिमों के संवैधानिक अधिकारों पर गंभीर खतरा बन गया है। तंजीम खुद्दाम आस्ताना का दावा है कि तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश में भी तीन पक्ष स्पष्ट रूप से है जबकि बाहरी लोग व साईं बिरादरी के लोग हस्तक्षेप कर दरगाह किछौछा को बदनाम कर यहां का माहौल खराब करने चाहते हैं। जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान सहित स्थानीय प्रशासन को भी प्रपत्र सौंप कर तत्काल बाहरी लोगों व साईं बिरादरी के लोगों का हस्तक्षेप बन्द कराने की मांग की गई है। खुद्दाम आस्ताना का दावा है कि बहुत जल्द उनका एक प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री से भेंट कर सारे मामलों से अवगत भी कराएगा और इस बीच अगर बाहरी व साईं बिरादरी के हस्तक्षेप बन्द नहीं हुआ तो आंदोलन भी किया जाएगा।
दूसरी तरफ दरगाह मोतवल्ली व सज्जादानशीन अल्लामा मौलाना सैय्यद शाह मोहिउद्दीन अशरफ ने मलंग के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि बिना मलंग के सहयोग के उर्स व मेला सकुशल सम्पन्न हो ही नहीं सकता है क्योंकि उर्स के दौरान मलंग ही ख़िरका मुबारक पहनाने, उसकी सुरक्षा करने एवं जायरीनों तक लाने ले जाने का कार्य करता है और दरगाह की ताज़िया आदि का काम भी मलंग द्वारा ही किया जाता है। श्री अशरफ ने बताया कि दरगाह इंतेजामिया कमेटी में कई मलंग बिरादरी के लोग भी शामिल है जिनके सहयोग से उर्स की रस्मों व मेला को सम्पन्न कराने की व्यवस्था की जाती है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा मात्र 11 ख़ादिम को गाइड के रूप में रहने की अनुमति दी गई है जबकि सैकड़ों की संख्या में मौजूद ख़ादिम जायरीनों से उसूली करते है जो काफी निंदनीय है।
बहरहाल दरगाह किछौछा का वार्षिक उर्स व मेला आगमी 21 अगस्त से शुरू होने वाला है जिसकी तैयारियां जोरशोर से चल रही है इस बीच दरगाह के ख़ादिम की कमेटी द्वारा बाहरी व साईं बिरादरी के लोगों के हस्तक्षेप करने पर बड़ा सवाल उठाया गया है और सीएम से मुलाकात करने एवं आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है जबकि दूसरी तरफ दरगाह मोतवल्ली व सज्जादानशीन मलंग बिरादरी के साथ खुला कर खड़े नजर आ रहे हैं।