अम्बेडकरनगर में ईरान के सुप्रीम लीडर शहीद आयतुल्लाह खामेनेई की याद में आयोजित श्रद्धांजलि सभाएं इस बार सिर्फ भावनात्मक नहीं रहीं, बल्कि खुलकर समर्थन और विरोध के स्वर भी सामने आए।
अकबरपुर के मरकजी इमामबाड़ा मीरानपुर और अब्दुल्लापुर से लेकर सम्मनपुर, जलालपुर और पकड़ी भोजपुर तक विभिन्न स्थानों पर बड़ी संख्या में सभी धर्मों के लोग एक मंच पर नजर आए।
मौलाना डॉ. हकीम इलाही के नेतृत्व में हुए इन कार्यक्रमों में सारंग जी महाराज और वरिष्ठ समाजसेवी धर्मवीर सिंह बग्गा जैसे चेहरों की मौजूदगी ने इसे “सर्वधर्म एकता” का संदेश दिया। जगह-जगह मौलाना का भव्य स्वागत हुआ, लेकिन जलालपुर में माहौल अचानक आक्रोश में बदल गया।
यहां भारी भीड़ ने अमेरिका और इज़राइल के शीर्ष नेताओं के साथ सऊदी प्रिंस के चित्रों को जमीन पर रखकर पैरों से कुचलते हुए विरोध जताया। गुस्से से भरे प्रदर्शनकारियों की नारेबाजी दूर तक गूंजती रही।
स्थिति को देखते हुए खुफिया विभाग पूरी तरह सतर्क नजर आया और हर गतिविधि पर निगरानी रखी गई।यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दों की गूंज अब स्थानीय स्तर तक पहुंच रही है—जहां एक तरफ एकता का मंच दिखा, वहीं दूसरी ओर गुस्से का उबाल भी खुलकर सामने आया।








