अम्बेडकरनगर: माँ की यादें कभी समाप्त नहीं होतीं… वे हर धड़कन में जीवित रहती हैं। अपनी माँ की पुण्यतिथि पर उन्हीं स्मृतियों को सेवा और करुणा में बदलते हुए हेल्पिंग हैंड्स फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं समाजसेवी मोहम्मद अकमल ने ऐसा कार्य किया, जिसने मानवता को नई परिभाषा दे दी। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी उन्होंने अपनी माँ को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए महामाया राजकीय मेडिकल कॉलेज, सदरपुर स्थित रक्त कोष में पहुंचकर चार यूनिट रक्तदान किया।
रक्तदान का यह क्षण उस समय बेहद भावुक हो उठा, जब आजमगढ़ से आईं उर्मिला पाण्डेय को डायलिसिस के लिए तत्काल रक्त की जरूरत पड़ी। उनके पुत्र कृष्ण पाण्डेय पहले ही रक्तदान कर चुके थे। चारों ओर बेबसी थी, चिंता थी, और आँखों में आँसू। घर की महिलाएं हाथ जोड़कर मदद की आस लगाए खड़ी थीं, लेकिन रक्त की व्यवस्था कहीं से नहीं हो पा रही थी। उस पल ऐसा लग रहा था मानो समय थम गया हो।
इसी अंधेरे में उम्मीद की एक रोशनी बनकर समाजसेवी मोहम्मद अकमल, उनके साथी गप्पु चौधरी, जफर इकबाल, अकरम सिद्दीकी और अन्य सहयोगी आगे आये। उन्होंने न केवल कृष्ण पाण्डेय को ढांढस बंधाया, बल्कि तुरंत रक्तदान कर एक माँ की जिंदगी बचाने का संकल्प भी पूरा किया। समय पर रक्त उपलब्ध होते ही उर्मिला पाण्डेय के इलाज को नई दिशा मिली और टूटती सांसों में फिर से जीवन की हलचल लौट आई।
माँ की पुण्यतिथि पर बहाया गया यह रक्त किसी रस्म का हिस्सा नहीं था, बल्कि उस माँ को दी गई सबसे सच्ची श्रद्धांजलि थी, जिन्होंने अपने बेटे को इंसानियत का पाठ पढ़ाया। यह दृश्य इस बात का गवाह बना कि जब दिल में संवेदना होती है, तब इंसान किसी का जीवन बन जाता है।
उक्त मौके पर गप्पु चौधरी, अकरम सिद्दीकी सहित अनेक समाजसेवी मौजूद रहे। सभी की आंखें नम थीं, लेकिन दिल इस बात से भरे थे कि इंसानियत आज भी ज़िंदा है।




