अम्बेडकरनगर: प्यार के नाम पर भरोसे का कत्ल और इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली यह घटना हर किसी को झकझोर देने वाली है। एक युवक पर आरोप है कि उसने नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने साथ भगा लिया, जबरन शादी की और फिर उसे लगातार प्रताड़ित करते हुए आखिरकार पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की कोशिश की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मऊ जिले की निवासी पूनम अपने पति सुरेश कुमार और बच्चों के साथ आजमगढ़ के सिधारी थाना क्षेत्र स्थित कांशीराम कॉलोनी जाफरपुर में रह रही थीं। इसी दौरान अंबेडकरनगर के जलालपुर कोतवाली क्षेत्र के शाहपुर फिरोजपुर गांव निवासी शिवा पुत्र शंकर की नजर उनकी नाबालिग बेटी जूली कुमारी पर पड़ी। आरोप है कि शिवा ने प्रेमजाल में फंसाकर किशोरी को अपने साथ भगा लिया और गांव ले जाकर डराकर शादी कर ली और फिर यहीं से शुरू हुआ हैवानियत का खेल। पीड़िता की मां के मुताबिक, आरोपी उसे हरियाणा के पानीपत और फिर दिल्ली ले गया, जहां वह रोजाना मारपीट और मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना का शिकार बनती रही।
घटना ने तब खौफनाक मोड़ लिया, जब गत 9 अप्रैल की रात करीब 2:30 बजे एक अज्ञात कॉल ने परिवार को हिला दिया। फोन पर बताया गया कि उनकी बेटी दिल्ली के अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है, और इलाज के नाम पर 3000 रुपया की मांग की गई। बदहवास मां ने तुरंत पैसे भेजे, लेकिन जब वह दिल्ली पहुंचीं तो सच्चाई ने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी—न तो कोई अस्पताल, न बेटी!
बाद में पता चला कि बेटी जलालपुर के एक अस्पताल में जिंदगी के लिए जंग लड़ रही है। जब मां वहां पहुंचीं तो बेटी की हालत देख उनका कलेजा कांप उठा—वह बुरी तरह जली हुई थी।
पीड़िता ने होश में आने पर जो बताया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। उसके अनुसार, उसके पति शिवा ने उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। वह चीखती-चिल्लाती रही, तब जाकर आरोपी के रिश्तेदार ने पानी डालकर आग बुझाई—वरना शायद उसकी जान नहीं बचती।
अब पीड़िता की मां न्याय के लिए दर-दर भटक रही है। उन्होंने जलालपुर कोतवाली में तहरीर देकर आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जलालपुर कोतवाल अजय प्रताप यादव के अनुसार, मामले में जीरो एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पीड़िता का मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान भी कराया गया है। आरोपी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
अब सवाल बड़ा है कि क्या प्यार के नाम पर इस तरह की दरिंदगी करने वालों पर सख्त और त्वरित कार्रवाई होगी, या एक और पीड़िता न्याय के इंतजार में सिस्टम के चक्कर लगाती रहेगी?








