उत्तर प्रदेश विधान परिषद में अम्बेडकरनगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का मामला जोरदार तरीके से गूंजा। विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने सदन में सीएमओ संजय कुमार शैवाल के विरुद्ध गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप उठाते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया।
एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की जांच आख्या में सीएमओ दोषी पाए गए, इसके बावजूद अब तक उनके खिलाफ न तो कोई विभागीय कार्रवाई हुई और न ही कानूनी कदम उठाए गए। उन्होंने सदन में सवाल दागते हुए कहा कि जब जांच रिपोर्ट में दोष स्पष्ट है, तो फिर कार्रवाई से बचाने का यह रवैया किसके इशारे पर है?
एमएलसी ने इसे स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार का गंभीर उदाहरण बताते हुए सीएमओ के खिलाफ कठोर से कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि कार्रवाई न होने से आम जनता में रोष और आक्रोश बढ़ रहा है, जो शासन-प्रशासन के लिए खतरनाक संकेत है।

मामले की गूंज के बाद शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है। विशेष सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने प्रकरण को गंभीर मानते हुए महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं से पूरे मामले की अद्यतन आख्या तलब की है। इससे साफ है कि मामला अब उच्च स्तर पर पहुंच चुका है।
हालांकि, बड़ा सवाल अब भी कायम है—क्या जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद सीएमओ पर वास्तव में कार्रवाई होगी, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? सदन में उठी आवाज के बाद अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।








