अदबी अंजुमनों व उत्कृष्ट कार्य करने वालों को मिला सम्मान
अम्बेडकरनगर। बज़्म-ए-फैज़ान-ए-हक़्क़ानी के बैनर तले टांडा क्षेत्र के सकरावल पूरब में आयोजित छठा जश्न-ए-ख्वाजा गरीब नवाज व नातिया मुशायरा आस्था, अदब और सामाजिक सरोकारों का एक यादगार मंच बन गया। ‘उस्ताद-उल-हुफ्फाज’ सिराज अहमद व उनकी पत्नी की स्मृति को समर्पित इस कार्यक्रम में देर रात तक भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने पूरे माहौल को रूहानी रंग में रंग दिया।
कार्यक्रम की सरपरस्ती रईस-ए मिल्लत मौलाना सैयद अजीज अशरफ अशरफी अल-जिलानी ने किया, जबकि कारी जमाल अशरफ निजामी की निगरानी और हाफिज मोहम्मद हामिद की अध्यक्षता में महफिल सजी। संचालन अशआर कामली ने प्रभावी अंदाज में किया।
महफिल की शुरुआत अज़ीम कामिल की तिलावत-ए-कुरान से हुई। खानकाह गौसिया अशरफिया किछौछा से आए मुफ्ती मोहम्मद रिजवान अजहरी ने ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्हें इंसानियत और मोहब्बत का सबसे बड़ा पैरोकार बताया।

संस्था के निदेशक कारी जमाल अशरफ निजामी ने अपने संबोधन में समाज सुधार के मिशन को दोहराते हुए बताया कि टांडा में 12 रबी-उल-अव्वल के अवसर पर अनुशासन व अदब का उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली 39 अंजुमनों को सम्मानित किया गया।

बज़्मे फैजाने हक्कानी फाउंडेशन द्वारा सैय्यद अज़ीज़ अशरफ व मुफ़्ती रिज़वान अजहरी की गुलपोशी कर सम्मानित किया गया। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए भी कई हस्तियों को सम्मान मिला। चिकित्सीय सेवा के लिए डॉ. मोहम्मद आतिफ, वक्फ संपत्तियों को निःशुल्क ऑनलाइन कराने के लिए शाहनवाज बज्मी, मास्टर मोहम्मद असलम खान तथा सूचना न्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ आलम खान को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
नातिया मुशायरे में यूसुफ आरजू बस्तवी, हिलाल अहमद टांडवी, कफील अशरफ टांडवी, अली रज़ा फैजी किछौछा, मोहम्मद अज़ीम कामिल और अबू साद इलाही जैसे शायरों ने अपने कलाम से महफिल को रौशन कर दिया। श्रोताओं ने देर रात तक मौजूद रहकर हर शेर पर भरपूर दाद दी।
अंत में संयोजक मेराज आलम और हाफिज व कारी कमाल अहमद ने सभी अतिथियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि समाज में एकता, शिक्षा और इंसानियत का मजबूत संदेश देने वाला एक प्रेरणादायक मंच साबित हुआ।








