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जाम के झाम से नहीं निकल पा रहा है बसखारी, थानाध्यक्ष रहे मनोज पन्त उर्फ सिंघम को लोग आज भी कर रहे हैं याद

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सड़कों पर लगती है दुकानें और प्राइवेट वाहन भरते हैं सवारियां, बिना स्टैण्ड के नगर पंचायत उसूलवाती है टोकन 

अम्बेडकरनगर (सूचना न्यूज़ रिपोर्ट) आध्यत्मिक इलाज़ के लिए विश्व विख्यात दरगाह किछौछा पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में जायरीनों श्रद्धालुओं का आवागमन होता है जिसमें अधिकांश लोगों को बसखारी चौराहा से ही हो कर जाना होता है लेकिन बसखारी चौराहा जाम के झाम से बाहर ही नहीं निकल पा रहा है जिससे श्रद्धालुओं सहित स्थानीय लोगों में भी काफी आक्रोश व्याप्त है।
बसखारी चौराहा पर जाम का मुख्य कारण बाजार में लगने वाली दर्जनों फलों की दुकानों ने दोनों तरफ के फुटपाथ को ही नहीं समाप्त कर दिया है बल्कि सड़को पर भी उनका कब्ज़ा दिखाई देता है। फल आदि की दुकानों के साथ ठेला, ई-रिक्शा, टेंपो व प्राइवेट बसें भी सड़कों पर खड़ा कर जाम लगाने में मुख्य किरदार निभा रहे हैं।
बसखारी चौराहा पर लगातार जाम की समस्या से स्कूली बच्चों व मरीजों व यात्रियों को काफी परेशानियों सामना करना पड़ता है। बसखारी बाजार के वरिष्ठ व्यापारी गोपाल स्वर्णकार ने कहा बसखारी बाजार में जाम की बहुत बड़ी समस्या है इससे जनमानस में काफी आक्रोश रहता है। इस जाम की मुख्य वजह टांडा व आज़मगढ़ रोड पर पटरी पर फल लगाने वाले लोग सड़क पर भी दुकानें लगाते हैं और प्राइवेट बस, टेंपो, ई-रिक्शा वाले बीच सड़क पर ही खड़ा करके सवारी भरते हैं। नगर पंचायत द्वारा पूर्व में एक बार अतिक्रमण हटवाया गया था परन्तु धीरे-धीरे लोग सड़क तक दुकान लगाने लगे है, जिससे सुबह से शाम तक जाम का सिलसिला चलता है। इस दौरान कोई मरीज लेकर अस्पताल तक नहीं जा सकता और स्कूली वाहनों को भी काफी मुश्किलें होती है।


बसखारी जाम को देख कर वर्षों पूर्व बसखारी के थानाध्यक्ष रहे मनोज कुमार पन्त (सिंघम) की याद ताज़ा हो जाती है जिनके द्वारा काफी कड़ाई बरती गई थी और बसखारी चौराहा, बाजार, पूर्वी व पश्चिमी तरह पूरी सड़क साफ दिखाई देती थी जिससे आवगमन का सुगम हो गया था लेकिन धीरे धीरे बसखारी पूरी तरह से जाम के झाम में फंस चुके है।
बसखारी थाना व ट्राफिक पुलिस के डयूटी के बाद भी जाम की समस्या से निजात नहीं मिल पा रहा है। चर्चा है कि बसखारी पुलिस प्रशासन मूकदर्शक की श्रेणी में है तथा सड़कों पर दुकान लगाने व वाहनों को खड़ा कर जाम लगाने वालों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाता है जिससे उन सभी का मनोबल बढ़ा हुआ है।

नगर पंचायत अशरफ पुर किछौछा भी बसखारी में लगने वाले जाम से आमजनों को राहत पहुंचाने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है। बसखारी में विधिवत कोई टैक्सी स्टैंड भी नहीं है। बस, टेंपो, ई-रिक्शा वालों से टेक्सी स्टैंड के नाम पर जबरन टोकन भी उसूले जाता है लेकिन वाहनों के ठहराओ का समुचित इंतेज़ाम तक नहीं है। जाम के बीच टेक्सी स्टैंड के नाम पर टोकन वसूली को लेकर अक्सर वाहन चालकों, व्यापारियों, दुकानदारों व राहगीरों से विवाद भी होता रहता है।

चर्चा है कि जब बसखारी में नियमानुसार टैक्सी स्टैंड की व्यवस्था नहीं है तो टैक्सी स्टैंड की नीलामी कर वसूली के लिए आधा दर्जन मनबढ़ लोगों को क्यों तैनात कर दिया जाता है जो जबरन वसूली करते हैं।

उद्योग व्यापार मंडल महामंत्री ने पूर्व में गत दिनों स्थानीय उद्योग व्यापार मंडल की पूरी टीम के साथ जिलाधिकारी से मिलकर पत्र के माध्यम से टैक्सी स्टैंड का मुद्दा उठाया था लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उद्योग व्यापार मंडल के पूर्व मंत्री रमेश रावत ने कहा इसके पूर्व में कई बार बसखारी पूर्व थानाध्यक्षों द्वारा कार्यवाही करते हुए अतिक्रमण को हटाया था लेकिन उनके ट्रांसफर के बाद लोगों ने वही पुराना रवैया अपना कर सड़कों पर अतिक्रमण व आवागमन अवरोध उत्पन्न करना करना शुरू कर दिया गया।
बहरहाल सूफी मखदूम अशरफ किछौछा पर प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है लेकिन नगर पंचायत, बसखारी पुलिस व ट्रैफिक पुलिस की उदासीनता व लापरवाही के कारण बसखारी जाम के झाम में फंसा कराह रहा है जिससे काफी काफी आक्रोश व्याप्त है।

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