अम्बेडकरनगर में अंडे की भारी कमी: सालाना 10.80 करोड़ जरूरत, उत्पादन आधा भी नहीं; पीडी डीआरडीए की सख्त समीक्षा बैठक
अम्बेडकरनगर: जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला के निर्देश पर परियोजना निदेशक डीआरडीए अनिल कुमार सिंह ने कलेक्ट्रेट सभागार में मंगलवार की देर सायं जनपद में अंडा उत्पादन एवं उपलब्धता को लेकर समीक्षा बैठक की। बैठक में सामने आए आंकड़ों ने जनपद में अंडा उत्पादन की स्थिति को चिंताजनक बताया।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1.5 से 1.7 करोड़ अंडों का उत्पादन हो रहा है, जबकि आवश्यकता 3.5 से 5.5 करोड़ प्रतिदिन की है। यानी प्रदेश स्तर पर भी भारी कमी बनी हुई है।
जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद अम्बेडकरनगर की कुल जनसंख्या लगभग 24 लाख है। 25 प्रतिशत आबादी की औसत खपत के आधार पर प्रतिदिन करीब 06 लाख अंडों की जरूरत आंकी गई। 180 अंडे प्रति व्यक्ति वार्षिक खपत के हिसाब से जनपद में कुल वार्षिक आवश्यकता 10 करोड़ 80 लाख अंडों की है। वर्तमान में जनपद का उत्पादन लगभग 30 लाख अंडे प्रतिमाह है, जबकि आवश्यकता लगभग 90 लाख प्रतिमाह है। इस प्रकार हर माह करीब 60 लाख अंडों की कमी बनी हुई है।
अम्बेडकरनगर में इस समय पांच पैरेंट फार्म तथा लगभग 400 से 500 ब्रायलर फार्म संचालित हैं। वर्तमान में कुल 7 लाख 20 हजार चूजों का उत्पादन हो रहा है, जबकि आवश्यकता 15 लाख चूजों की है।
बैठक में पीडी डीआरडीए ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि कुक्कुट विकास नीति 2013 के तहत संचालित योजनाओं के प्रति किसानों और बेरोजगार युवाओं को व्यापक रूप से जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा सस्ती दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। मार्च 2013 से 2022 के बीच जो लाभार्थी योजना से आच्छादित नहीं हो सके हैं, उन्हें कामर्शियल लेयर और ब्रायलर पैरेंट फार्म स्थापना के लिए प्रेरित किया जाए।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश कुक्कुट विकास नीति-2022 के अंतर्गत जनपद में कुक्कुट पालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन और अनुदान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। नीति का उद्देश्य अंडा और मांस उत्पादन बढ़ाना, प्रोटीन युक्त आहार की उपलब्धता सुनिश्चित करना, सतत आपूर्ति बनाए रखना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन करना है।
नीति के तहत 10 हजार क्षमता की व्यावसायिक लेयर इकाई एक एकड़ भूमि में, 30 हजार क्षमता की ब्रायलर इकाई 2.5 एकड़ में, 60 हजार क्षमता की लेयर इकाई 4 एकड़ में तथा 10 हजार क्षमता की ब्रायलर पैरेंट इकाई 4 एकड़ में स्थापित की जा सकती है। लाभार्थियों को बैंक ऋण पर 7 प्रतिशत ब्याज की प्रतिपूर्ति, भूमि क्रय या लीज पर स्टाम्प शुल्क में शत-प्रतिशत छूट तथा विद्युत संयोजन पर पांच वर्ष तक सभी प्रकार के सरचार्ज में शत-प्रतिशत छूट जैसी रियायतें दी जा रही हैं।
पात्र पशुपालकों के लिए न्यूनतम एक एकड़ भूमि अनिवार्य है तथा 30 प्रतिशत मार्जिन मनी की व्यवस्था करनी होगी। इच्छुक अभ्यर्थी विभागीय कार्यालय से संपर्क कर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
परियोजना निदेशक डीआरडीए ने पशुपालकों एवं युवा उद्यमियों से अपील की कि वे योजना का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनें और जनपद में कुक्कुट उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में भागीदारी करें। बैठक में अंडा उत्पादन से जुड़े उद्यमी एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान उद्यमियों के सुझाव और अपेक्षाएं भी सुनी गईं।








