आम को फलों का राजा कहा जाता है और गर्मी के मौसम में तरह तरह के आम बाज़ारों में बिकते हैं । जिन्हें हम लगभग प्रतिदिन अपने घरों में प्रयोग भी करते हैं।

आग आप भी आम को बिना सोचे समझे खा रहे हैं तो सावधान हो जाइए, क्योंकि हो सकता है कि आप भी आम के साथ खतरनाक कैमिकल को भी खा रहे हो और जिसका खामियाजा आपके शरीर को भुगतना पड़े।

जी हां, सही पढ़ा आपने, आम के साथ कैमिकल का खेल चल रहा है। फल विक्रेता डाल व पाल का आम बता कर आपको बेच रहा है लेकिन वो कभी नहीं बताएगा कि आम को कैसे तैयार किया जाता है।

हम पहले आपको बताते चलेंकि आम को खाने से पहले चन्द घण्टों के लिए उसे पानी में भिगाकर रखें और जहां तक हो सके आम के छिलकों को मुंह मे ना डालें।

आम को भिगाकर खाने की रस्म काफी पुरानी है। जब कैमिकल से आम नहीं पकाया जाता था तब भी आम को पानी मे देर तक भिगाकर रल्हन जाता था। आम पानी मे भिगाकर रखने से काफी स्वादिष्ट हो जाता है और उसके ऊपर लगी गंदगी भी साफ हो जाती है।

आम को पानी मे भिगाकर खाने से त्वचा से सम्बंधित कई समस्याओं का निराकरण भी हो जाता है जिसमें मुंहासे, फुंसियां, सिरदर्द के साथ पेट मे कब्ज़ कु समस्या व आंत से सम्बंधित बीमारियां सही हो जाती है।
रात्रि में भीगा हुआ आम खाने के बाद आप देखेंगे कि आपका पेट काफी साफ हो गया है और बाथरूम में आपको देर तक समय भी नहीं देना पड़ा जिससे बात साफ हो जाती है कि पेट के कब्ज़ ब आंत की समस्या को ठीक करने में भीगा आम काफी लाभदायक है।

आम के साथ कैमिकल का रिश्ता बौर लगने के साथ ही शुरू हो जाता है। फसलों को कीट पतंगों से बचाने के लिए आम की बाग में कीटनाशक दवाओं का जमकर छिड़काव होता है। वो कीटनाशक दवाएं ज़हरीली होती है। आम का फल आने के बाद भी ज़हरीली कीटनाशक दवाओं का छिड़काव पुनः किया जाता है।

आम की फसल तैयार होने के बाद उसे पकने से पहले तोड़ लिया जाता है और कच्चे आमों को सलीके से रखकर पाल लगाई जाती है। आम को विभिन। तरीकों से तैयार किया जाता है लेकिन उक्त तरीकों में ज़हरीला कैमिकल ही प्रयोग किया जाता है जो काफी तेज व खतरनाक होता है।

आम में काफी मात्रा में फाइटोकेमिकल्स होते हैं। पानी भर भिगाने से उनकी मात्रा कम हो जाती है जिससे वो नैचुरल फैट बस्टर की तरह काम करने लगता गया। और इसलिए कहा जाता है कि आम को भिगाकर खाने से फैट बर्न (मोटापा कम करने) में मदद मिलती है।

विशेषज्ञों की माने तो केमिकल वाले आम खाने वाले सावधान हो जाएं क्योंकि ये कैमिकल आम के साथ आपके पेट में जा रहा है और इससे स्किन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, ब्रेन डैमेज, कोलन कैंसर, नर्वस सिस्टम को नुकसान हो रहा है इसलिए ऐसे कैमिकल युक्त आम खाना सेहत के लिए खतरनाक है। आम खाने से पहले पहचान करना है कि आम कैमिकल से पका तो नहीं है। कैमिकल से पके आमों का रंग कई ज्यादा पीला और कहीं हरा दिखता है। अधिक कैमिकल वाला आम कहीं पर कड़ा होता है तो कहीं पर अधिक गला होता है। ऐसे आमों को ढेर सारे पानी मे भिगाकर रखें और फिर छिलका उतार कर खाएं। ऐसे आमों को चूसने से बचना चाहिए अन्यथा कैमिकल आपके शरीर मे पहुंच कर काफी नुकसान करेगा।

फलों विशेष रूप से आम को खाने से पहले पानी में भिगोकर रखने से इन परेशानियों से बचा जा सकता है। इसके अलावा, ऐसा करने से इसके तने पर लगा दूधिया रस हट जाता है जिसमें फाइटिक एसिड होता है।
फाइटिक एसिड उन पोषक तत्वों में से है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा और बुरा दोनों हो सकता है। इसे एक एंटी पोषक तत्व माना जाता है, जो शरीर को आयरन, जिंक, कैल्शियम और अन्य मिनरल्स को अवशोषित करने से रोकता है, जिसकी वजह से शरीर में मिनरल्स की कमी होने लगती है।

न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, आम में फाइटिक एसिड नाम का एक प्राकृतिक मॉलिक्युल होता है, जो कई फलों, सब्जियों और नट्स में भी पाया जाता है। फाइटिक एसिड शरीर में गर्मी पैदा करता है। जब आम को कुछ घंटों के लिए पानी में भिगोया जाता है, तो इससे फाइटिक एसिड को हटाने में मदद मिलती है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि आम खाने से पहले काम से कम एक घण्टा अवश्य भिगाकर रखें जिसे आप व आपके परिवार को हानिकारक कैमिकल से बचाव हो सके और आम खाने के वास्तविक लाभ भी मिल सके।