अम्बेडकरनगर। मोहर्रम की सातवीं तारीख पर जनपद के टाण्डा, अकबरपुर, जलालपुर और दरगाह किछौछा सहित विभिन्न क्षेत्रों में अलम, ताबूत, दुलदुल व मेहंदी के ऐतिहासिक जुलूस पूरे अकीदत, एहतराम और गमगीन माहौल में निकाले गए। जुलूसों के दौरान जगह-जगह नौहाख्वानी और सीनाजनी हुई तथा हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और शोहदाए कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की गई। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा।
टाण्डा नगर क्षेत्र में सातवीं मोहर्रम पर कई स्थानों से जुलूस बरामद हुए। मुख्य जुलूस राजा साहब के इमामबाड़े से निकला, जो अपने परंपरागत मार्गों से गुजरते हुए आर्य कन्या इंटर कॉलेज के पास पहुंचा, जहां मातमदारों ने जमकर सीनाजनी की। छोटी बाजार से स्वर्गीय रशीद का प्रसिद्ध जुलूस बिना ढोल-ताशे के सादगीपूर्ण माहौल में निकाला गया, जबकि सकरावल का जुलूस ढोल-नगाड़ों के साथ परंपरागत मार्गों से होकर गुजरा। अलीगंज के सालारगढ़ से भी ऐतिहासिक जुलूस बरामद हुआ।
दरगाह किछौछा में भी हर वर्ष की भांति मुख्य आस्ताना से ताजिया जुलूस निकाला गया, जो शांतिपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और कर्बला के शहीदों को याद कर मातम किया।
अकबरपुर में अंजुमन अकबरिया रजिस्टर्ड के नेतृत्व में देर रात शाही इमामबाड़ा मीरानपुर से जुलूस निकाला गया। यह जुलूस फव्वारा तिराहा, पुरानी तहसील तिराहा और शाहजादपुर चौक सहित विभिन्न परंपरागत मार्गों से होकर गुजरा। शाहजादपुर चौक से अंजुमन हैदरिया रजिस्टर्ड और अंजुमन अकबरिया रजिस्टर्ड के सदस्यों ने फव्वारा तिराहा तक नौहाख्वानी और सीनाजनी की।
जुलूस में शामिल मातमदार “या हुसैन” की सदाओं के साथ आगे बढ़ते रहे। बुधवार सुबह लगभग 11 बजे जुलूस पुनः शाही इमामबाड़े पहुंचा, जहां मौलाना जरीर हुसैन की मजलिस आयोजित हुई। मजलिस में कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों और हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) के पैगाम पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
मजलिस के दौरान उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं। अंजुमन के सदस्यों ने छुरी का मातम भी किया, जबकि नौहाख्वानी के दौरान पूरा माहौल गम और अकीदत से सराबोर रहा।
मोहर्रम के अवसर पर जनपद भर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। विभिन्न जुलूसों के मार्गों पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार निगरानी करते रहे, जिससे सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुए।




