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अम्बेडकरनगर: पॉवर लूम बुनकरों की समस्याओं को प्रमुख्यता से उठाने में जुटी उत्तर प्रदेश बुनकर सभा ने टाण्डा तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री को पांच सूत्रीय ज्ञापन भेजते हुए तत्काल बुनकरों की सहायता करने की मांग किया है।
ज्ञापन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अवगत कराते हुए बताया कि बुनकरों का एक मात्र रोजी रोटी का साधन पावरलूम लघु उद्योग है। कपड़ा बुनाई का कारोबार बुनकरों का पुश्तैनी कारोबार है, जिसमें प्रदेश के लाखों परिवार जुड़े हुए है । कृषि के बाद बुनकरों का पावरलूम उद्योग ही है जो असंगठित क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्रदान करता है । आपको अवगत कराना है कि लाकडाउन से सबसे बुरा असर बुनकरों के पावरलूम लघु उद्योग पर पड़ा है । चूँकि बुनकरों द्वारा तैयार कपड़ा पूरे भारत की मण्डियों के साथ विदेशों में भी निर्यात होता था जो कि लाकडाउन के वजह से बिल्कुल बन्द हो गया है। पूरे प्रदेश में बुनकरों द्वारा तैयार करोड़ रूपये का कपड़ा डम्प पड़ा हुआ है। साथ ही बुनकरों का जो पैसा भारत की मण्डियों में बाकी है, वह भी नहीं आ रहा है। ऐसी स्थिति में बुनकरों के सामने अत्यन्त गम्भीर संकट खड़ा हो गया है। पावरलूम बन्द हो गये है तथा पावरलूमों पर काम करने वाले बुनकर मजदूर बेकार हो गये है। प्रधानमंत्री जी द्वारा घोषित लाकडाउन का पूरे प्रदेश के बुनकर पालन कर रहे है और देश व प्रदेश में कोरोना वाइरस के फैलाव को रोकने के लिए देश के साथ खड़े है। महोदय निवेदन है कि जिस तरह से किसानों को राहत पैकेज दिया गया है उसी तरह से बुनकरों को भी अपना कारोबार चालू रखने, आजीविका चलाने के लिए राहत पैकेज देने की आवश्यकता है। इसी के साथ आपको यह भी अवगत कराना है कि वर्ष 2006 से उत्तर प्रदेश के पावरलूम बुनकरों के लिए विद्युत की फ्लैट रेट योजना चल रही थी , जिसको राज्य सरकार ने 04 दिसम्बर 2019 को नया शासनादेश जारी कर समाप्त कर दिया तथा 01 जनवरी 2020 से मीटर रीडिंग के आधार पर विद्युत बिल जमा करने का शासनादेश जारी किया जिस पर परे प्रदेश के बुनकरों ने विरोध जताया है , जिसको देखते हुए माननीय मुख्यमंत्री जी ने मार्च 2020 तक । पुरानी व्यवस्था फ्लैट रेट पर ही विद्युत बिल जमा करने के लिए मौखिक आदेश कर दिया था और कहा था कि पुनः सारी परिस्थितियों पर विचार विमर्श कर नया शासनादेश जारी किया । जायेगा जो 01 अप्रैल 2020 से लाग होगा . जिसके सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश बुनकर सभा के जातानाधया काहथकरघा मन्त्री माननीय सिद्धार्थ नाथ सिंह एवं अपर मख्य सचिव श्रआ रमारमण जी के साथ कई राउण्ड वार्ता भी हो चुकी थी, परन्तु मार्च के तीसरे सप्ताह में लाकडाउन लगने की वजह से कोई निर्णय नहीं हो सका । अब जबकि लाकडाउन के कारण प्रदेश के सभी पावरलूम लघु उद्योग बन्द ह आर । भविष्य में भी आर्थिक संकट के कारण पावरलूम बुनकरों का कारोबार चल पाना असम्भव लग रहा है , ऐसे में पावरलूम बुनकरों की विद्युत की वर्ष 2006 से चली आ रही पुरानी व्यवस्था फ्लैट रेट को ही बहाल किया जाना पावरलूम लघु उद्योग एवं प्रदेश के विकास के हित में होगा। क्योकि नये शासनादेश से बुनकर केवल विद्युत विभाग का बकायेदार ही होगा , जिससे भविष्य में तमाम कठिनाईयाँ पैदा होगी।
उत्तर प्रदेश बुनकर सभा के अध्यक्ष हाजी इफ़्तेख़ार अहमद अंसारी ने मांग किया कि किसानों की तरह बुनकरों के उत्पाद को भी लाभ के साथ सरकार द्वारा खरीदा जाये , जिसके लिए प्रदेश से समस्त बुनकर बाहुल्य क्षेत्रों में क्रय केन्द्र खोला जाये जहाँ पर बुनकरों द्वारा तैयार कपड़े को खरीदा जाये । जब तक पूरे भारत में लाकडाउन है तब तक प्रत्येक बुनकर को 2000 रूपये प्रति पावरलूम प्रतिमाह की दर से सहायता दी जाये। बुनकरों को कारोबार के टर्नओवर के हिसाब से कम से कम दो वर्ष के लिए ब्याज मुक्त ऋण दिया जाये। पावरलूम बुनकरों की विद्युत की पुरानी फ्लैट रेट योजना ( वर्ष 2006 के शासनादेश ) को यथावत बहाल किया जाये। पावरलूम बुनकर मजदूरों को चिन्हित कर अन्य मजदूरों की तरह इनको भी आर्थिक मदद दी जावें।

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