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ऑल इंडिया बज़्मे अशरफ के अध्यक्ष सैयद हैदर किछौछवी और जनरल सेक्रेटरी मौलाना सैयद आरफ़ अशरफ किछौछवी की तरफ़ से CAB/ CAA के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।

मौलाना सैयद आरफ़ अशरफ किछौछवी ने बताया कि इस विवादित कानून के आने से जहां संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उंलंघन हुआ है वही दूसरी ओर देश के सेक्युलर विचारधारा के लोग ठगा महसूस कर रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल याचिका में कानून को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द करने की मांग की गई।

श्री हैदर ने कहा कि आल इंडिया बज़्मे अशरफ इस बिल और बनाये गए कानून का पुरज़ोर विरोध करता है और इस लड़ाई को संवैधानिक रूप से लदी जाएगी तथा सुप्रीम कोर्ट से पूरा इंसाफ मिलने की उम्मीद है। उन्होंने दावा किया कि किसी भी हाल में देश के संविधान और भारतीय नागरिको के साथ अन्याय नही होने देगी। श्री हैदर ने कहा कि विरोध का मतलब हिंसा नहीं होती इसलिए हिंसा से दूर रहना चाहिए।

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ बात करते हुए आल इंडिया बज़्मे-अशरफ़ के अध्यक्ष और मासिक पत्रिका सूफ़ीये-मिल्लत के चीफ एडिटर सैयद हैदर किछौछवी ने कहा है कि ये कानून भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान का उल्लंघन करता है. भेदभाव के रूप में यह धर्म विशेष के प्रवासियों को बाहर निकालता है और केवल हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, ईसाइयों, पारसियों और जैनियों को नागरिकता देता है, साथ ही संविधान की मूल संरचना और मुसलमानों के खिलाफ स्पष्ट रूप से भेदभाव करने का इरादा है। उन्होंने कहा कि ये संविधान में निहित समानता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है और धर्म के आधार पर बहिष्कार करके अवैध आप्रवासियों के एक वर्ग को नागरिकता देने का इरादा रखता है और प्रत्येक नागरिक समानता के संरक्षण का हकदार है ।
सैयद हैदर ने कहा कि यदि कोई विधेयक किसी विशेष श्रेणी के लोगों को निकालता है तो उसे राज्य द्वारा वाजिब ठहराया जाना चाहिए। नागरिकता केवल धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि जन्म के आधार पर हो सकती है। उन्होंने कहा कि ये कानून समानता और जीने के अधिकार का उल्लंघन है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।

सैयद हैदर ने कहा कि यह कानून भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है, यह संविधान की मूल संरचना / प्रस्तावना के खिलाफ है तथा धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं दी जा सकती।

आल इंडिया बज़्मे-अशरफ किसी भी प्रकार की हिंसक प्रदर्शन के ख़िलाफ़ है और अपनी संवैधानिक लड़ाई को माननीय सुप्रीम कोर्ट में लड़ेगी और संविधान के ख़िलाफ़ किसी भी कानून को सही करार नही देगी।

श्री हैदर ने कहा कि संवैधानिक रूप से विरोध करना ठीक है लेकिन हिंसा का कदापि समर्थन नहीं करते हैं तथा हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की भी मांग करते हैं।

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