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बलिया जिला जेल से कोरोना का एक संदिग्ध मरीज जिला अस्पताल पहुंचा | जिसे प्राथमिक परीक्षण के बाद आइसुलेसन वार्ड में भेज दिया गया| चौकाने वाली बात ये रही कि जिला जेल में बंद इस कैदी को जिला अस्पताल लाने वाले जेल के सिपाही न तो मास्क लगाये थे साथ ही जिला अस्पताल में परीक्षण करने वाले डाक्टर ने महज एक मामूली मास्क पहन कर कोरोना संदिग्ध की जाँच की।
1- देश में कोरोना ने दस्तक क्या दी केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक कोरोनो से लड़ने के लिए कमर कस ली, पर जमीनी हकीकत क्या है ये देखने को मिला बलिया जिला चिकित्सालय में जहा हरियाणा का रहने वाला एक कैदी जिला जेल में जाँच कराने पहुंचा| दरअसल कैदी को कुछ दिनों से सुखी खांसी थी लिहाज़ा उसे जिला अस्पताल परीक्षण के लिए भेजा गया था पर इमरजेंसी में बैठे डाक्टर ने बिना किसी सुरक्षा उपाय के महज एक मामूली सा मास्क लगा कर संदिग्ध मरीज का परीक्षण किया और वहा मौजूद भीड़ संदिग्ध मरीज के आस पास तमाशबीन बनी रही |
2- टीवी से लेकर रेडियो तक, अखबारों से लेकर पोस्टरों तक, ये बताया जा रहा है कि कोरोना संदिग्ध मरीजो के आस पास किस तरीके की सावधानी बरती जाये पर इस मामले में चौकाने वाली बात ये रही कि जिला जेल के जिस कैदी को जेल के सिपाही जिला अस्पताल तक लेकर आये उन्होंने मास्क तक नहीं लगा रखा था| लिहाज़ा जब जिला जेल के सिपाहियों से पूछा गया कि आप ने मास्क क्यों नही लगा रखा? तो जिला जेल के सिपाही ने सरकार के इन्तजामो की पोल खोल के रख दी| सिपाही का दावा है कि बलिया जिला जेल में लगभग एक हजार कैदी है ऐसे में कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए जिला जेल अस्पताल में न तो मास्क है न ही कोई संसाधन ऐसे में जान हथेली पर रख कर डियूटी करना हमारी मज़बूरी है।
3- कोरोना वायरस जैसे संक्रमण से पूरा देश लड़ रहा है ऐसे में बिना संसाधन के जिला अस्पताल और और जिला जेल की ये लडाई कितनी कारगर होगी ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा पर इतना जरुर है की सरकार कोरोनो को लेकर जितनी भी जागरूक दिख रही हो पर सरकारी मशिनिरिया भगवान भरोसे ही है|

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