अम्बेडकरनगर: ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन ने अब सरकार की राजस्व व्यवस्था पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। तीसरे दिन भी जनपद के पांचों उप निबंधक कार्यालय से जुड़े दस्तावेज लेखक कलमबंद हड़ताल पर डटे रहे। टाण्डा में आंदोलनरत लेखकों ने अपनी मांगों को लेकर उपजिलाधिकारी टाण्डा डॉ. शशि शेखर को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार ने नई व्यवस्था पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।दस्तावेज लेखकों का कहना है कि सरकार द्वारा लागू की जा रही ई-रजिस्ट्री व्यवस्था उनके अस्तित्व और रोजगार पर सीधा हमला है। उनका आरोप है कि डिजिटल व्यवस्था के नाम पर वर्षों से दस्तावेज लेखन, स्टाम्प विक्रय और पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका छीनने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त संसाधनों, तकनीकी प्रशिक्षण और हितधारकों से संवाद के लागू की जा रही यह व्यवस्था न केवल रोजगार विरोधी है, बल्कि आम जनता के लिए भी परेशानी का कारण बन सकती है।
ज्ञापन में दस्तावेज लेखकों ने मांग की कि ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को तत्काल वापस लिया जाए अथवा उसमें ऐसे संशोधन किए जाएं जिससे दस्तावेज लेखकों की भूमिका और रोजगार सुरक्षित रह सके। उनका कहना है कि आम नागरिकों को बैनामा, विक्रय पत्र, वसीयत, हिब्बानामा तथा अन्य दस्तावेजों के निर्माण में तकनीकी और कानूनी मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है, जिसे पूरी तरह ऑनलाइन व्यवस्था से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता।
हड़ताल का असर अब राजस्व पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दस्तावेज लेखकों के अनुसार टाण्डा उप निबंधक कार्यालय में लगातार तीसरे दिन रजिस्ट्री कार्य लगभग ठप रहा, जिससे करीब 40 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हो चुका है तथा जनपद में लगभग दो करोड़ राजस्व हानि हो चुकी है। रजिस्ट्री कराने पहुंचे दर्जनों लोगों को बिना काम कराए लौटना पड़ रहा है, जिससे आम नागरिकों की परेशानी भी बढ़ गई है।
आंदोलन का असर केवल टाण्डा व अम्बेडकरनगर तक सीमित नहीं है। अयोध्या मंडल के विभिन्न जिलों में रजिस्ट्री कार्य प्रभावित होने से सरकारी खजाने को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं दस्तावेज लेखक संगठनों का दावा है कि प्रदेश के लगभग 125 उप-पंजीयक कार्यालयों और पंजीकरण केंद्रों में हड़ताल जारी है। यदि प्रति केंद्र औसतन 10 लाख रुपये प्रतिदिन राजस्व प्रभावित होने का अनुमान लगाया जाए तो प्रदेश सरकार को प्रतिदिन करीब 12 करोड़ 50 लाख रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। तीन दिन में यह आंकड़ा 37 करोड़ 50 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
दस्तावेज लेखक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर रजिस्ट्री कार्य बंद होने से जमीन और संपत्ति खरीद-फरोख्त से जुड़े हजारों लोग असमंजस की स्थिति में हैं। ऐसे में अब निगाहें शासन और पंजीकरण विभाग पर टिकी हैं कि वह राजस्व हानि और बढ़ती नाराजगी के बीच इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए क्या कदम उठाता है।
टाण्डा ज्ञापन सौंपने के दौरान बैनामा लेखक राजेश यादव, मनोज वर्मा, जुनैद अर्शी खान, पंकज त्रिपाठी, रमेश यादव, मो.कौसर, शराफत हुसैन, महेश कुमार, आत्मा राम, कृष्ण बिहारी यादव, अखिलेश कुमार, राम तीरथ, बृजेश यादव आदि सहित बड़ी संख्या में दस्तावेज लेखक, स्टाम्प विक्रेता तथा संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। (आलम खान एडिटर/मान्यता प्राप्त पत्रकार की विशेष रिपोर्ट)




